राबर्ट्सगंज स्थित गोवंश आश्रय स्थल।
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सोनभद्र। जिले में संचालित कुल 17 पशु आश्रय स्थलों में रखे गये 1226 पशुओं के लिए चारा-पानी की समुचित व्यवस्था की गई है। पशुओं की देखभाल के लिए लगाये गए कर्मचारी पशुओं को समय-समय पर चारा-पानी देते हैं। जिले के अधिकारी भी समय-समय पर पशु आश्रय स्थलों का निरीक्षण करके व्यवस्था देखते रहते हैं। राबर्ट्र्संगंज नगर स्थित अस्थाई गो आश्रय स्थल में कुल 201 गाय और बछड़े रखे गये है। गो आश्रय स्थल का संचालन नगर पालिका परिषद राबर्ट्र्ंसगंज करता है। आश्रय स्थल मे बने गोदाम में भूसा व पुआल की कुटी भरा मिला। वरिष्ठ लिपिक प्रसिद्धनाथ शुक्ला का कहना है कि एक महीने चारा का स्टॉक रखा हुआ है। चारा उपलब्ध कराने के लिए संस्था को टेंडर हुआ है। वहीं चारा उपलब्ध कराता है। आश्रय स्थल में ही पशुओं के पानी पीने के लिए तीन स्थान पर टंकी बनवाया गया है। चारा-पानी की व्यवस्था के लिए आश्रय स्थल में छह कर्मचारी गनेश, छोटेलाल, रामगोविंद, रामअवतार, हरिराम, अमरनाथ की ड्यूटी लगाई गई है। चोपन: स्थानीय गांव में बनाए गए पशु आश्रय स्थल में कुल 211 गाय और बछड़े रखे गए हैं। इसका संचालन जिला पंचायत द्वारा किया जा रहा है। यहां पर रखे गए पशुओं के लिए सभी जरूरी सुविधाओं का ध्यान रखा जा रहा है। जिला पंचायत कर्मी पंचू राम ने बताया कि आश्रय स्थल में रखे गए पशुओं की देखभाल के लिए छह कर्मचारियों को नियुक्त किया गया है। पशुओं के लिए समय पर पानी और चारे की व्यवस्था सुनिश्चित कराई जा रही है। लाकडाउन के दौरान आश्रय स्थल तक खली आदि ले जाने के लिए कर्मचारियों को पास उपलब्ध कराया गया है, जिससे कोई असुविधा ना हो। प्रति पशु के चारे के लिए प्रतिदिन 30 रुपये निर्धारित किया गया है। आश्रय स्थल पर बिजली हैं। पानी के लिए पंप लगाया गया है। गर्मी में पशुओं के लिए छांव की व्यवस्था टीनशेड की गई है। ओबरा: क्षेत्र स्थित खैरटिया गांव में बनाए गए पशु आश्रय स्थल में कुल 22 गाय और बछड़े रखे गए हैं। इसका संचालन ओबरा नगर पंचायत द्वारा किया जा रहा है। यहां पर रखे गए पशुओं के लिए सभी जरूरी सुविधाओं का ध्यान रखा जा रहा है। ओबरा नगर पंचायत के अधिशासी अधिकारी अमित कुमार सिंह ने बताया कि आश्रय स्थल में रखे गए पशुओं की देखभाल के लिए तीन कर्मचारियों को नियुक्त किया गया है। पशुओं के लिए समय पर पानी और चारे की व्यवस्था सुनिश्चित कराई जा रही है। अभी आश्रय स्थल में बिजली कनेक्शन नहीं होने के कारण पानी के लिए सौर्य ऊर्जा से संचालित होने वाला पम्प लगाया गया है। गर्मी में पशुओं के लिए छांव की टीनशेड की व्यवस्था की गई है। जिले के अन्य पशु आश्रय स्थलों में भी चारा-पानी की व्यवस्था है, व्यवस्था में लगे कर्मचारी समय से चारा-पानी देते हैं।