सोनभद्र। लंबे इंतजार के बाद निकाय चुनाव के लिए आरक्षण की सूची बृहस्पतिवार को जारी हो गई। नई सूची में जिले की दस में से चार सीटों को विभिन्न वर्ग की महिलाओं के लिए आरक्षित किया गया है, जबकि पांच निकायों में अध्यक्ष का पद अनारक्षित है। सबसे चर्चित जिला मुख्यालय की सीट को अनुसूचित जाति की महिला के लिए आरक्षित किया गया है। पूर्व में जारी आरक्षण में यह सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित थी। वहीं महिलाओं के लिए छह सीटें आरक्षित की गई थी। आरक्षण जारी होते ही कई चेहरे खिल गए हैं तो कइयों पर मायूसी छा गई है।
निकाय चुनाव के लिए पांच दिसंबर को आरक्षण सूची जारी की गई थी, मगर पिछड़ा वर्ग के प्रतिनिधित्व को लेकर मामला कोर्ट में जाने से इसे रद्द कर दिया गया था। कोर्ट के आदेश पर शासन ने आयोग का गठन कर नए सिरे से पिछड़ा वर्ग का सर्वे कराया था। आयोग की रिपोर्ट के बाद कोर्ट के आदेश पर नए सिरे से निकायों के आरक्षण की अधिसूचना जारी की गई है। बृहस्पतिवार की शाम आरक्षण सूची जारी होते ही निकायों में चुनावी सरगर्मी तेज हो गई। मनमाफिक सीटों का आरक्षण होने पर दावेदारों की बांछे खिल गई, वहीं जिनके अनुकूल आरक्षण नहीं हुआ, वह मायूस होकर इसकी खामियां गिनाते नजर आया। जिला मुख्यालय की सीट होने के कारण राबर्ट्सगंज नगर पालिका की सीट पर सबकी निगाहें लगी थीं। दिसंबर की सूची में अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीट के इस बार बदले जानी पूरी उम्मीद सामान्य व ओबीसी वर्ग के दावेदार लगाए बैठे थे, लेकिन नई सूची में भी यह सीट अनुसूचित जाति महिला के हिस्से में चली गई। इसी तरह खनन क्षेत्र ओबरा में अध्यक्ष पद फिर से अनुसूचित जाति महिला के लिए आरक्षित हुआ है, जबकि राज्य मंत्री संजीव सिंह गोंड के गृह नगर नवसृजित डाला बाजार नगर पंचायत को अनुसूचित जनजाति की महिलाओं के लिए आरक्षित किया गया है। आरक्षण सूची जारी होने के भावी उम्मीदवारों के नाम पर चर्चाएं तेज हो गई हैं। संभावित दावेदारों ने भी सक्रियता बढ़ा दी है।
फिर अनारक्षित हुआ पिपरी और रेणुकूट
आरक्षण को लेकर चर्चा में रही पिपरी और रेणुकूट नगर पंचायत की सीट फिर से अनारक्षित हो गई है। इन दोनों सीटों पर अब तक इसी वर्ग से प्रतिनिधि चुने जाते रहे हैं। लगातार सीट अनारक्षित रहने से इस पर ढेरों आपत्ति और हो-हल्ला भी मचता रहा है। दिसंबर में जारी सूची में भी पिपरी अनारक्षित और रेणुकूट का आरक्षण महिलाओं के लिए हुआ था, जिसके बाद कई आपत्तियां देते हुए ओबीसी या एससी के आरक्षण की मांग उठी थी। नई सूची में फिर से दोनों सीटें अनारक्षित हो गई हैं।
निकायों का आरक्षण::
निकाय: अभी का आरक्षण: दिसंबर में यह था आरक्षण
राबर्ट्सगंज: अनुसूचित जाति महिला: अनुसूचित जाति
अनपरा: अनारक्षित: पिछड़ा वर्ग
चोपन: अनारक्षित: अनारक्षित
रेणुकूट: अनारक्षित: महिला
पिपरी: अनारक्षित: अनारक्षित
घोरावल: अनारक्षित: महिला
दुद्धी: पिछड़ा वर्ग: महिला
चुर्क-घुरमा: पिछड़ा वर्ग महिला: पिछड़ा वर्ग
ओबरा: अनुसूचित जाति महिला: पिछड़ा वर्ग महिला
डाला बाजार: अनुसूचित जनजाति महिला: महिला
दावेदारों की टूटी हसरत, गिनाई खामियां
ओबरा। आरक्षण सूची जारी होने के बाद कई दावेदारों के सपने टूट गए हैं तो कइयों के मन में नई हसरत जगी है। वर्ष 2017 के चुनाव में अनुसूचित जाति महिला के लिए आरक्षित रही अध्यक्ष की सीट फिर से इसी वर्ग के हिस्से में आई है। निवर्तमान नगर पंचायत अध्यक्ष प्रानमति देवी, राज सुशील पासवान, भोला कनौजिया आदि का कहना है कि शासन निर्णय स्वागत योग्य है। वहीं रमेश सिंह यादव, अपना दल-एस युवा मंच के प्रदेश उपाध्यक्ष आनंद पटेल दयालु ने कहा कि आरक्षण ने सामान्य वर्ग एवं अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए पूरी तरह से सभी रास्ते बंद कर दिए हैं। पिछली बार की तरह इस बार भी यह सीट अनुसूचित वर्ग के आरक्षित कर दी गई है। इसके खिलाफ आपत्ति दर्ज की जाएगी।