राबर्ट्सगंज कचहरी के फैमिली कोर्ट में सुनवाई को आई एक महिला और उसके परिवारवालों ने शुक्रवार को दोपहर विपक्ष के वकील पर हमला कर दिया। यह देख वहां मौजूद वकीलों ने हमलावरों को दौड़ा लिया तो वे सीजेएम के आफिस में घुस गए। बाद में पुलिस ने उन्हें किसी तरह से बाहर निकाला । घायल अधिवक्ता की तहरीर पर कोतवाली पुलिस ने महिला समेत चार लोगों पर केस दर्ज कर उनका चालान कर दिया।
घरेलू हिंसा के मामले में राबर्ट्सगंज कचहरी परिसर स्थित मीडिएशन सेंटर में राबर्ट्सगंज नगर के हरधाबाबा कालोनी निवासी सत्यावती और उसके पति पंकज दूबे निवासी मुल्लाडीह (पटखा गांव) थाना घोरावल का केस चल रहा है। दोनों पक्षों को शुक्रवार को सुलह-समझौते के लिए बुलाया गया था। दोनों पक्ष अपने पिता और भाइयों के साथ कचहरी पहुंचे थे। मीडिएटर वकील कन्हैया सिंह ने बताया कि सदर तहसील में तैनात रजिस्ट्रार कानूनगो प्रेमनाथ शुक्ला की बेटी सत्यावती की शादी घोरावल थाना क्षेत्र के मुड़िलाडीह गांव निवासी पंकज दूबे संग हुई थी। आरोप है कि दहेज में बोलेरो की मांग करते हुुुए ससुरालवाले सत्यावती को प्रताड़ित करते थे। उन लोगों ने आठ फरवरी 2015 को मारपीट कर उसे घर से निकाल दिया। सत्यावती ने एसीजेएम कोर्ट में घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत पति समेत सात लोगों के विरुद्ध परिवाद दाखिल किया। कोर्ट ने आरोपियों को तलब कर इस मामले को मीडिएटर सेंटर में भेज दिया। बताया कि सुनवाई के दौरान सिर्फ पति-पत्नी को बातचीत के लिए बैठाया गया था। शेष लोग बाहर थे कि दोपहर करीब 12.30 बजे दोनों पक्षों में कहासुनी के बाद मारपीट की स्थिति बन गई। इस पर कोर्ट से बाहर निकली सत्यावती ने कचहरी में ही पति के अधिवक्ता प्रदीप शुक्ला पर पिता और भाइयों के साथ हमला कर दिया। यह देख आसपास के वकीलों ने हमलावरों को दौड़ा लिया।
चारो सीजेएम कोर्ट के कार्यालय में घुस गए और अंदर से दरवाजा बंद कर लिया। इस पर सोनभद्र बार एसोसिएशन के अध्यक्ष ओम प्रकाश राय समेत अन्य अधिवक्ता घेरेबंदी कर नारेबाजी करने लगे। बाद में सीजेएम संजय कुमार यादव, एडीएम रामचंद्र, एएसपी शंभू शरण यादव, एसडीएम अशोक कुमार सिंह यादव वहां पहुंच गए और करीब एक घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद सत्यावती समेत उसके पिता और दोनों भाई को बाहर निकाला गया।
मिर्जापुर से राबर्ट्सगंज कचहरी में पेश के लिए आए कैदियों ने शाम के समय हंगामा खड़ा कर दिया। लॉकअप पर बंदियों ने मिर्जापुर जेल जाने से इनकार कर दिया। करीब आधे घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद नायब तहसीलदार और एलआईयू इंस्पेक्टर के समझाने-बुझाने और अगली तिथि पर मिर्जापुर जेल न भेजे जाने के आश्वासन के बाद मामला शांत हुआ।
जिला प्रशासन की ओर से एक सितंबर को ही 50 बंदियों को गुर्मा जिला कारागार में शिफ्ट करने का आश्वासन दिया गया था। लेकिन आज तक एक भी बंदी को शिफ्ट नहीं किया गया।
इसी बात को लेकर बंदी बलवंत यादव की अगुवाई में शुक्रवार की शाम को करीब साढ़े तीन बजे बंदियों ने लॉकअप में ही विरोध शुरू कर दिया। मौके पर पहुंचे नायब तहसीलदार पवन कुमार सिंह और एलआईयू इंस्पेक्टर जगदीश सिंह ने बंदियों को काफी समझाने-बुझाने का प्रयास किया, लेकिन बंदी नहीं मान रहे थे। अंत में यह आश्वासन दिया कि अगली पेशी पर मिर्जापुर जेल में नहीं भेजा जाएगा तब सभी बंदी शांत हुए। इसके बाद बंदियों को लॉकअप से बाहर निकाल कर वाहन में बैठाकर मिर्जापुर जिला जेल ले जाया गया।
पीड़ित अधिवक्ता प्रदीप कुमार शुक्ला की तहरीर में आरोप लगाया गया है कि हमलावरों ने उनका पर्स जिसमें दो हजार रुपये और गले से सोने की दो भर चेन भी छीन ली तथा जान मारने की धमकी दी थी। एएसपी शंभू शरण यादव ने बताया कि अधिवक्ता की तहरीर पर आरोपियों पर केस दर्ज कर उनका चालान कर दिया गया है।