डीएम बद्रीनाथ सिंह ने आग के कारणों और क्षति का अनुमान लगाने के लिए पांच सदस्यीय टीम गठित की है। टीम में राजस्व, पुलिस, अग्निशमन, सीआईएसएफ और परियोजना के अधिकारी शामिल हैं। डीएम ने बताया कि करीब 50 करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान है। वास्तविक स्थिति जांच रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट हो पाएगी।
आग इतनी भीषण थी कि काबू पाने में अग्निशमन इकाई के जवानों को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। करीब चार घंटे तक आठ वाहन आग बुझाने में लगे रहे। आग और धुएं का गुबार कई किमी दूर तक फैला था, जिसे देख लोग सहम गए थे। आग लगने की सूचना पर सबसे पहले परियोजना में स्थित सीआईएसएफ की फायर इकाई मौके पर पहुंची। सीआईएसएफ के पांच वाहन आग बुझाने में लगे रहे। इसके बाद फायर ब्रिगेड को सूचना को दी गई।
कुछ देर में चोपन और रॉबर्ट्सगंज अग्निशमन केंद्र से एक-एक फायर टेंडर पहुंच गए। सीमेंट फैक्टरी के भी फायर टेंडर को बुलाया गया। अग्निशमन विभाग ने रेणुकूट से हिंडाल्को की फायर यूनिट, घोरावल और मिर्जापुर के अग्निशमन केंद्र से भी मदद मांगी। तीनों स्थानों से वाहन रवाना हुए। तब तक स्थिति नियंत्रण में आने के कारण उन्हें रास्ते से ही लौटा दिया गया। साढ़े नौ बजे तक आग पर काबू पा लिया गया था, लेकिन इसे पूरी तरह बुझाने में करीब साढ़े दस बज गए।
स्विचयार्ड विद्युत प्रणाली का वह हिस्सा है, जो जनरेटिंग प्लांट और ट्रांसमिशन सिस्टम के बीच की कड़ी का काम करता है। ओबरा-बी परियोजना के स्विचयार्ड में 400 केवी क्षमता के पांच पावर ट्रांसफॉर्मर लगे हैं। प्रत्येक पावर ट्रांसफॉर्मर 200 मेगावाट वाली एक इकाई से जुड़ा है। इकाई से बनने वाली बिजली को 400 केवीए का इंटर कनेक्टिंग ट्रांसफॉर्मर 220 केवी में बदलकर बिजली ग्रिड को भेजता है।
अधिकारी बोले
प्रथम दृष्टया आग लगने की वजह ट्रांसफॉर्मर का काफी पुराना होना प्रतीत हो रहा है। घटना के कारणों और नुकसान के आकलन के लिए निगम मुख्यालय से भी टीम बनाई गई है। यह टीम शुक्रवार की सुबह घटनास्थल पर पहुंचकर जांच करेगी। - इं. आरके अग्रवाल, मुख्य महाप्रबंधक, ओबरा परियोजना