सोनभद्र। जिले के एक निजी अस्पताल में कैंसर का डर दिखाकर बच्चेदानी के ऑपरेशन का मामला सामने आया है। आरोप है कि ऑपरेशन के दौरान टांका अंदर से टूटने की बात कहते हुए दोबारा चीरा लगाया गया। इसके बाद भी हालत नहीं सुधरी तो परिवार के लोग सीएचसी घोरावल पहुंचे। वहां पेट के अंदर ड्रेसिंग पट्टी पड़े होने के खुलासे ने उनके होश उड़ा दिए। पीड़िता को वाराणसी जाकर ऑपरेशन कराना पड़ा। पीड़िता के भाई की तहरीर पर घोरावल पुलिस ने महिला डॉक्टर के खिलाफ संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच में जुटी हुई है।
घोरावल कोतवाली क्षेत्र के मझिगवां चौहान निवासी मनोज कुमार का आरोप है कि उसकी बहन ऊषा देवी (43) पत्नी संतराम मौर्य निवासी बट, मधुपुर, थाना-राॅबर्ट्सगंज को पेट में दिक्कत थी। इसकी रिपोर्ट दिखाने के लिए वह घोरावल क्षेत्र के पीसीएम अस्पताल पिपरवार गईं। वहां डाॅ. अनीता सिंह मिली। उन्होंने रिपोर्ट देखकर कहा कि बच्चेदानी में समस्या है। तत्काल ऑपरेशन करा लीजिए नहीं तो कैंसर हो जाएगा। वह अपने ही अस्पताल में अच्छा सर्जन बुलाकर ऑपरेशन करवा देंगी। पांच सितंबर 2025 को उसने बहन को वहां भर्ती करा दिया। उसी दिन उसकी बच्चेदानी काटकर बाहर निकाल दी गई। बाहर से कोई डॉक्टर नहीं बुलाया गया। डॉ. अनीता ने खुद ही ऑपरेशन किया। 13 सितंबर 2025 को 17 हजार का बिल बनाया और पैसे लेकर छुट्टी दे दी। कोई डिस्चार्ज पेपर नहीं दिया गया। चार दिन बाद टांका काटने के लिए बुलाया। 17 सितंबर को पहुंचने पर कहा गया कि अंदर का टांका टूट गया है। दोबारा ऑपरेशन करना पड़ेगा। ऐसा न किए जाने पर जान जाने का डर दिखाते हुए 21 सितंबर को फिर से ऑपरेशन कर दिया गया। 10-12 दिन बाद 27 हजार का बिल बनाया गया। रुपये जमा करने के बाद छुट्टी दी गई। इस बार भी डिस्चार्ज पेपर नहीं दिया गया। कई दिनों तक दवा-उपचार के बाद भी घाव से दर्द और हल्का पस आने की स्थिति बनी रही। लगातार दवा के बाद भी आराम न मिलने पर वह उसे लेकर पीएचसी घोरावल पहुंचा।
नहीं मिली राहत तो लगाया गया छोटा कट... तब हुआ खुलासा:
सीएचसी घोरावल में सर्जन डाॅ. मुकेश ने जांच की। उन्होंने भी कुछ दिन दवा के बाद घाव को सूख जाने का भरोसा दिया लेकिन संक्रमण की स्थिति बनी रही। तब उन्होंने जिस जगह पहले ऑपरेशन किया गया था वहां छोटा कट लगाकर देखा तो पता चला कि उसके अंदर ड्रेसिंग करने वाली पट्टी काफी ज्यादा मात्रा में पड़ी हुई थी। दावा किया गया है कि डॉक्टर ने सिर्फ उसे ही नहीं उसकी बहन के परिवार के लोगों को भी बुलाकर पट्टी दिखाई। कहा कि इसे ठीक करने के लिए बड़ा ऑपरेशन करना पड़ा। इसके लिए उन्हें जिला चिकित्सालय या किसी बड़े अस्पताल में दिखाना पड़ेगा। तब वह लोग वाराणसी पहुंचे। वहां डाॅ. सौरभ अग्रवाल को दिखाए। जांच के बाद 14 फरवरी को ऑपरेशन कर पेट में रूई व ड्रेसिंग पट्टी निकाली गई। प्रभारी निरीक्षक बृजेश कुमार सिंह के मुताबिक डॉ. अनीता के खिलाफ बीएनएस की संबंधित धारा-एक्ट के तहत मामला दर्ज कर जांच जारी है।