रेणुकूट में लापता आनंद के माता-पिता। स्रोत स्वयं
रेणुकूट। घर के बाहर खेलते-खेलते अचानक लापता हुआ आनंद (12) आज भी अपने माता-पिता की आंखों में जिंदा है। वक्त की सुइयां 12 साल आगे बढ़ गईं, लेकिन उम्मीद वहीं दरवाजे और उस रास्ते पर ठहरी है, जहां से कभी उनका बेटा गया था। वहां से उसके लौटने का इंतजार आज भी जारी है।
पिपरी थाना क्षेत्र के वार्ड आठ निवासी योगेश प्रजापति के लिए 20 सितंबर 2014 की शाम जिंदगी का सबसे लंबा अंधेरा बन गई। ड्यूटी पर गए पिता और घर के काम में व्यस्त मां की नजर से ओझल हुआ आनंद फिर कभी वापस नहीं लौटा।
शहर से लेकर दूसरे जिलों और राज्यों तक खोजबीन की गई, लेकिन हर बार मायूसी ही हाथ लगी। योगेश बताते हैं कि आनंद उनकी इकलौती संतान था। वह ठीक से बोल नहीं पाता था, जिससे उसकी पहचान और भी मुश्किल हो गई। बेटे की तलाश में उन्होंने उत्तर प्रदेश ही नहीं, झारखंड और मध्य प्रदेश तक छान मारा, लेकिन उसका कोई सुराग नहीं मिला।
वक्त बीतने के साथ पुलिस ने भी फाइल बंद कर दी, मगर एक पिता का विश्वास कभी खत्म नहीं हुआ। मां ऊषा देवी बताती हैं कि उस दिन आनंद घर के सामने खेल रहा था। कुछ देर बाद बाहर आईं तो वह गायब था। अगले दिन सूचना मिली कि एक बच्चा दुद्धी रेलवे स्टेशन पर देखा गया, लेकिन जब तक पिता वहां पहुंचे, वह शक्तिपुंज एक्सप्रेस से कहीं जा चुका था।
अब एसपी की पहल पर पुराने मामलों की फिर से जांच शुरू होने से इस परिवार की उम्मीदों में एक बार फिर जान लौट आई है कि शायद उनका आनंद सच में लौट आए।