एक नवंबर से जिले में धान खरीद शुरू होगा। शासन की तरफ से धान खरीद के लिए एमएसपी दर निर्धारित किया गया है। पिछले वर्ष की तुलना मे ंइस वर्ष एमएसपी दर में एक रुपये बढ़ोत्तरी की गई है, लेकिन इससे किसान संतुष्ट नहीं है। उनका कहना है कि खेती लागत ज्यादा बढी है, इसके मुकाबले बढ़ाई गई एमएसपी दर कम हैं। साथ ही किसानों ने शासन प्रशासन से धान खरीद में पारदर्शिता बरतने की मांग की।
किसानों का कहना है कि पिछले वर्ष धान खरीद का एमएसपी दर 1940-1960 रुपये निर्धारित था। इस वर्ष सरकार की तरफ से धान के एमएसपी दर में बस एक रुपये प्रति किलो की बढ़ोत्तरी की गई है। जबकि बढ़ती महंगाई के कारण फसल के उत्पादन की लागत में वृद्धि हुई है। किसानों का कहना है कि जिले में पिछले वर्ष धान के खरीद में जमकर मनमानी हुई थी। धान खरीद नहीं हो पाने के कारण बड़ी संख्या में किसानों को बिचौलियों के यहां धान बिक्री करना पड़ा था। किसानों ने बढ़ी लागत से सापेक्ष एमएसपी दर को कम बताया। कहा कि सरकार केेेलागत के हिसाब से एमएसपी दर बढ़ाना चाहिए। तभी किसानों की आय दोगुनी होगी। सरकार की तरफ से जारी एमएसपी दर किसानों को हजम नहीं हो रही है। इसके साथ ही किसानों ने धान खरीद में पारदर्शिता बरतने की मांग की।
डीजल पर दी जाए सब्सिडी
डीजल के दाम में बढ़ोत्तरी होने से सिंचाई, जोताई आदि की लागत बढ़ गई है। फसल का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) फसल उत्पादन लागत के मुताबिक ठीक नहीं है। इसमें बढ़ोतरी होनी चाहिए। सरकार ने आय दोगुना करने का वादा किया था। लागत दो गुना हुई मगर आय नहीं। इस बार धान खरीद का लाभ किसानों को मिले। इसके लिए ऑफलाइन नंबर लगे। किसानों के पास सुविधा ना होने का लाभ उठाकर बिचौलियें खतौनी लेकर उनकी फलस खरीद लेते हैं। इस बार खरीद में पारदर्शिता हो। - चंद्रभूषण पाण्डेय, किसान नेता।
बिचौलियों पर कसे नकेल
जिले में पिछली बार धान की खरीद में जमकर धांधली हुई थी। बिचौलिए हावी रहे। ऐसे में किसानों को सस्ते दाम पर अपनी फसल को बेचना पड़ा। तय दर की लागत के सापेक्ष काफी कम है। इसे भी अन्य सामग्रियों के दाम के अनुपात में बढ़ाया जाय। इससे किसानों की आय दोगूनी कर पाना संभव नहीं है। - राजनाथ मौर्य, किसान नेता।