सोनभद्र। एससी/एसटी एक्ट के मसले को लेकर सवर्ण, पिछड़ा समाज और अल्पसंख्यक वर्ग के लोगों में बृहस्पतिवार को गजब की एकजुटता दिखी। दल, विचारधारा से इतर सभी ने एक साथ भारत बंद में भाग लिया। विरोध में पूरे जिले में बाजार बंद रखा गया। जुलूस निकाला, प्रदर्शन किया। भाजपा नेताओं की होर्डिंग फाड़ी। चक्काजाम कर आवाज उठाई। राबट्र्सगंज में मेन चौक के पास उत्तर मोहाल में दुकान बंद कराने के दौरान झड़प के बाद तोड़फोड़ से माहौल तल्ख हो गया।
इस दौरान होटल पर सामान लेने गई एक दस वर्षीय बालिका दर्शना कड़ाही में खौलते तेल का छींटा पड़ने से झुलस गई। मामले में दुकानदार की तरफ से चार नामजद और कई अज्ञात के खिलाफ तहरीर दी गई है। स्थिति नियंत्रित करने के लिए पुलिस को लाठी पटकने के साथ ही 59 लोगों को गिरफ्तार करना पड़ा।
भारत बंद को लेकर सुबह दस बजते-बजते राबर्ट्र्सगंज, दुद्धी, करमा, रामगढ़, घोरावल, शाहगंज, चोपन, डाला, करमा, मधुपुर, वैनी, खलियारी, कोन, म्योरपुर, विंढमगंज, अनपरा, शक्तिनगर, बीना, बभनी सभी जगह एससी-एसटी एक्ट के विरोधियों का हुजूम सड़कों पर उतर पड़ा। जगह-जगह सभा कर केंद्र सरकार को जमकर कोसा। जुलूस निकालकर भी विरोध जताया। राबर्ट्र्सगंज में चाचा नेहरू चौक में सुबह दस बजे आंदेालन की रणनीति बनाई गई।
इसके बाद लोगों का हुजूम बाजार बंद कराते हुए सड़क पर निकल पड़ा। बढ़ौली चौक पर सभी लोग धरने पर बैठ गए। कुछ देर बाद मेन चौक पहुंचे। यहां से उत्तर मोहाल की तरफ बढ़ते समय मना करने के बावजूद एक कपड़े की दुकान, एक कास्मेटिक्स की दुकान, होटल और सिलाई की दुकान खुली देख भड़क उठे। पहले दुकान बंद करने को कहा। ध्यान न देने पर तोड़फोड़ शुरू कर दी। यहां के बाद धर्मशाला चौक पहुंचे। यहां भी कुछ दुकानें खुली देख हंगामा किया।
दुकान बंद होने के बावजूद वापस मेन चौक की तरफ मुड़े। तब तक इस तरह से दूसरे पक्ष के लोग तोड़फोड़ का विरोध करने पहुंच गए। स्थिति को अनियंत्रित होकर देख विरोध करने पहुंचे लोगों को मेन चौक पर एएसपी अरूण कुमार दीक्षित ने रोक दिया। वहीं आंदोलनकारियों को साईं चौक के पहले एसडीएम सादाब असलम और सीओ विवेकानंद तिवारी ने रोका। दोनों जगह समझाने का दौर चल रहा था, तभी मेन चौक पर कुछ लोग आगे बढ़ने की जिद करने लगे। तब पीएसी के जवानों को लाठियां भांजनी पड़ी। वही साईं चौक पर 59 को गिरफ्तार कर पुलिस लाइन ले जाया गया। देर शाम सभी को निजी मुचलिका भरवाकर छोड़ दिया गया।
उध्ार, एससी-एसटी एक्ट का अधिवक्ताओं ने भी जमकर विरोध जताया। इसे काला कानून बताते हुए भारत बंद के समर्थन में न्यायिक कार्य से विरत रहकर आवाज उठाई। जिला कचहरी में सोनभद्र बार एसोसिएशन और डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन के लोगों ने तहसील गेट के सामने चक्काजाम और प्रदर्शन कर एतराज जताया। भोला सिंह यादव, अमरनाथ मिश्र, सुधाकर मिश्र, विनोद कुमार शुक्ल, ब्रजेश धर, महेंद्र प्रसाद शुक्ल,ने कहा कि बिना विवेचना गिरफ्तारी मौलिक अधिकार का हनन है। किसी हाल में इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। लालता प्रसाद पांडेय और धनंजय कुमार मौर्या ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के विरुद्ध अध्यादेश लाकर सवर्ण और पिछड़ा समाज की अस्मिता से खिलवाड़ किया गया है।
भुक्तभोगी अधिवक्ता अनिल सिंह कुशवाहा ने बताया कि उन्हें एससी-एसटी एक्ट में फर्जी ढंग से फंसाकर दो सालों से परेशान किया जा रहा है। अधिवक्ता मनोजपति त्रिपाठी ने भी एक्ट में फर्जी तरीके से फंसाने की बात कही। कहा कि इसके चलते उनकी पढ़ाई बाधित हो गयी। मनोजधर ने कहा कि केंद्र सरकार का यह निर्णय सुप्रीम कोर्ट की गरिमा के विपरीत है। योगेश द्विवेदी, रमेशचंद्र मिश्र, सुशील चौबे, ज्ञानेंद्र शरण राय, राजीव कुमार सिंह, विमलेश कुमार, पवन कुमार मिश्रा, शशिशंकर त्रिपाठी, अरुण शुक्ल, दराजकुमार पटेल, सुरेश सिंह, आदि ने भी विरोध जताया।
दुद्धी: एससी-एसटी एक्ट के विरोध में दुद्धी में भी अधिवक्ताओं नें मोदी सरकार के खिलाफ जमकर भड़ास निकाली। संयुक्त बार की बैठक हुई, जिसमें बार संघ अध्यक्ष जितेंद्र श्रीवास्तव और सिविल बार अध्यक्ष सचिव अशोक तिवारी ने कहा कि मोदी सरकार ने मनमाने ढंग से सवर्ण और पिछड़ा वर्ग की उपेक्षा करते हुए विधि के विपरीत एससी एसटी एक्ट में गलत संसोधन किया है, जिसे किसी भी रूप में सही नहीं ठहराया जा सकता। न्यायिक कार्य से विरत रहकर भारत बंद का समर्थन किया।जुलूस निकाला और मोदी सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। संकट मोचन तिराहे पर सभा कर भड़ास निकली। भारत सरकार को संबोधित ज्ञापन भी डीएम प्रतिनिधि नायब तहसीलदार संगीता पांडेय को सौंपा।
जितेंद्र श्रीवास्तव, कुलभूषण पांडेय, प्रेमचंद्र यादव, प्रेमचंद्र गुप्ता, रामप्रकाश सिन्हा, वीरेंद्र अग्रहरी, संतोष गुप्ता, अशोक तिवारी, रामजी पांडेय, आदि मौजूद रहे। घोरावल: तहसील अधिवक्ता समिति और दी घोरावल बार एसोसिएशन की संयुक्त बैठक हुई। समिति अध्यक्ष सच्चिदानंद चौबे ने अध्यक्षता की। एससी-एसटी एक्ट में किए गए संशोधन का विरोध करते हुए इसे वापस लेने की मांग की। रामअनुजधर द्विवेदी, आदिनाथ मिश्र, गोपाल सिंह, जय सिंह, रामकिंकर पाठक, सिद्धराज सिंह, राजेंद्र पाठक, सुनील कुमार चौबे, दिनेश प्रताप सिंह आदि थे।
उध्ार, ऊर्जांचल में गुरुवार को भारत बंद का मिलाजुला असर देखने को मिला। दुकानदारों ने दुकानें तो खोल रखीं थी, लेकिन एससीएसटी एक्ट कानून के प्रति लोगों में आक्रोश दिखाई पड़ा। भारत बंद के समर्थन में अधिकांशत: सामान्य व पिछड़ी वर्ग के लोग सोशल मीडिया व चट्टी चौराहों पर एससी-एसटी एक्ट की चर्चा करते नजर आये। लोगों का कहना था कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले को अध्यादेश लाकर बदलने वाली केंद्र सरकार की दोहरी नीति नहीं चलने दी जायेगी। वोट बैंक की राजनीति कर रही भाजपा को 2019 में इसका गंभीर परिणाम भुगतना पड़ेगा। यहां अनपरा बाजार, औड़ी मोड़, काशी मोड़, डिबुलगंज, ककरी, बीना, खड़िया सहित अन्य स्थानों पर लोगों ने विरोध किया।
सिंगरौली : प्रशासन के धारा 144 लागू करने के बावजूद सामाजिक संगठनों के आह्वान पर एससी एसटी एक्ट में संशोधन के विरोध में सिंगरौली में बंद का असर दिखा। बैढन, नवानगर, विंध्यनगर, जयंत, निगाही, बरगवां, मोरवा, देवसर व सरई में बंद का मिलाजुला असर रहा।