सिंगरौली परिक्षेत्र (सोनभद्र एवं सिंगरौली) में प्रदूषण नियंत्रण के लिए अब तक कार्ययोजना प्रस्तुत न करने पर एनजीटी की मुख्य पीठ ने नाराजगी जताई है। चेयरमैन स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली पीठ ने बुधवार को मामले की सुनवाई करते समय यूपी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को हर हाल में 14 दिन में कार्ययोजना पेश करने का निर्देश दिया। अगली सुनवाई दो दिसंबर को होगी।
जिले के सामाजिक कार्यकर्ता जेएन विश्वकर्मा और सिंगरौली निवासी अधिवक्ता अश्वनी दुबे ने एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) में प्रदूषण के मसले पर याचिका दाखिल की है। एनजीटी ने कोर कमेटी बनाकर सोनभद्र और सिंगरौली के परियोजना क्षेत्रों का अध्ययन करवाया था।
कोर कमेटी ने 20 अगस्त को सौंपी गई रिपोर्ट में बताया है कि सोनभद्र-सिंगरौली में कुल मिलाकर रोज 21 हजार मेगावाट बिजली उत्पादन होता है। इस क्षेत्र में प्रतिदिन 20 टन धूल कण, 2394 टन सल्फर डाई आक्साइड, 2725 टन नाइट्रोजन आक्साइड और 14 किलो पारा उत्सर्जन होता है।
कमेटी ने प्रदूषण की रोकथाम के लिए सुझाव भी दिए थे। अधिवक्ता एवं प्रख्यात पर्यावरणविद एमसी मेहता के मुताबिक बुधवार को दिल्ली स्थित स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली मुख्य बेंच ने मामले की सुनवाई की।
बेंच ने पाया कि मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कार्ययोजना प्रस्तुत कर दिया है, लेकिन उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने अब तक ऐसा नहीं किया है। पीठ ने दो सप्ताह के भीतर कार्ययोजना प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। गौरतलब है कि प्रदूषण में सिंगरौली परिक्षेत्र का अनपरा, शक्तिनगर, बीजपुर से लेकर ओबरा तक के इलाके हैं।