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पंडालों में शक्ति का आवाहन

Tue, 20 Oct 2015 12:03 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, सोनभद्र
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राबर्ट्सगंज में शारदीय नवरात्र पर पूजा पंडालों में दुर्गा प्रतिमाएं प्राण प्रतिष्ठा के साथ स्थापित हो गई। नगर के बढ़ौली चौक, उत्तर मोहाल, सब्जी मंडी, आरटीएस क्लब, रेलवे स्टेशन रोड आदि क्षेत्रों में पूजा पंडालों के पट खोले गए। उधर जिले के अन्य क्षेत्रों में दुर्गा पूजन आयोजन को लेकर लोगों में उत्साह रहा। पहले दिन मां कात्यायनी और कालरात्रि की पूजा की गई। बढ़ौली चौक स्थित आटो मोबाइल्स संघ, न्यू मार्केट में अंबे महोत्सव, आरटीएस क्लब,  कैमूर महोत्सव, उत्तर मोहाल नवरात्रि दुर्गा पूजा समिति की ओर से पूजा पांडाल तैयार किया गया है।
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रेणुकूट प्रतिनिधि के अनुसार पिपरी स्थित मां अनंत पदमावती सेवा आश्रम परिसर व हनुमान मंदिर परिसर में स्थित मां संकट हरणी मंदिर में शारदीय नवरात्र का पर्व धूमधाम व उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। मां संकट हरणी मंदिर में आश्रम के महंत पं. वीर विक्रम नारायण पांडेय द्वारा सोमवार को कात्यायनी और कालरात्रि का पूजन-अर्चन किया गया। आचार्य ने बताया कि मां कात्यायनी की पूजा कन्याओं के विवाह में आ रही बाधा दूर करने के लिए किया जाता है।

 ये वैद्यनाथ नामक स्थान पर प्रगट होकर पूजी गईं। मां दुर्गा की सातवीं शक्ति कालरात्रि होती है। इनके  शरीर का रंग घने अंधकार की तरह  होती है। सिर के बाल बिखरे हुए होते है। गले में विद्युत की तरह चमकने वाली माला है। इनके  सांसों में अग्रि निकलती है। दाहिने हाथ से भक्तों को वर देती है।
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नीचे वाला हाथ अभय मुद्रा में होती है। ये सदैव शुभ फल देने वाली मां है। आचार्य ने बताया कि  मंदिर परिसर  में प्रतिदिन सुबह तीन बजे से ही पूजन आदि का कार्य शुरू हो जाता है। सुबह पहले दुर्गा सप्तशती व स्वर्ण भैरव का पाठ होता है। इसके बाद मंगला आरती होती है।

ब्रह्म मुहूर्त में प्रात: तीन से छह बजे तक होने वाले पाठ और मंगला आरती में भाग लेने वाले भक्तों का कल्याण होता है। स्वर्ण भैरव का दर्शन करने के बाद संकट हरणी का दर्शन करने से भक्तों की सभी मनोकामना पूरी होती है। दुद्धी में भी  पूजा पंडालों में मां दुर्गा जी की प्रतिमाएं स्थ्ाापित हुई। वैदिक मंत्रों के साथ्ा  प्राण प्रतिष्ठा की गई।पांडाल गुंजायमान रहा। काली मंदिर, पंचदेव मंदिर, संकट मोचन मंदिर और रामनगर के महावीर मंदिर पर  मां दुर्गा की भव्य मूर्ति की प्राण-प्रतिष्ठा हुई।
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