सोनभद्र। जिले के 97 गांवों में इस बार भी दीये की रोशनी में ही दीपावली मनेगी। अभी तक इन गांवों में बिजली नहीं पहुंच सकी है। यहां के लोगों के लिए बिजली सपने जैसा है।
बिजली निगम ने कुछ मजरों में विद्युतीकरण की कवायद जरूर शुरू की थी, मगर खंभे लगाने तक सीमित रह गई। इसके पीछे कारण जो भी हों, मगर प्रदेश में सर्वाधिक बिजली उत्पादन करने वाले सोनभद्र में दीप तले अंधेरा वाली कहावत चरितार्थ हो रही है।
चार प्रांतों से घिरे सोनभद्र जिले को देश की ऊर्जा राजधानी इसलिए कहा जाता है कि यहां बिजली और कोयला का उत्पादन बड़े पैमाने पर होता है। मौजूदा समय में राज्य विद्युत उत्पादन निगम के साथ ही एनटीपीसी की इकाईयों से 22 हजार मेगावाट से अधिक का बिजली उत्पादन हो रहा है।
यहां बनने वाले बिजली से बड़े शहर रोशन हो रहे हैं, लेकिन यहीं के लोगों का जीवन अंधेरे में है। ग्रामीण इलाकों में विद्युतीकरण की तमाम योजनाएं आईं, मगर अभी भी 97 मजरों में विद्युतीकरण नहीं हो पाई। सबसे अधिक म्योरपुर ब्लॉक के टोले-मजरे बिजली की रोशनी से वंचित है।
जबकि इसी ब्लॉक में स्थित प्रदेश के सबसे बड़े जलाशय में से एक रिहंद बांध पर एनटीपीसी के साथ ही राज्य उत्पादन निगम की इकाईयां स्थापित हैं। म्योरपुर ब्लॉक के साथ ही दुद्धी, नगवां, रॉबर्ट्सगंज, घोरावल, चोपन, बभनी ब्लॉक में कुल 97 टोले-मजरों में बिजली नहीं पहुंच सकी है।
इन मजरों में इस साल भी दिवाली के अवसर पर अंधेरा रहेगा और यहां के रहवासी दीये की रोशनी में ही दिवाली मनाएंगें। हालांकि कुछ ग्रामीणों के पास सोलर लाइटें लगी है, सोलर लाइट से ही वह घर को रोशन करने का