गंभीर मरीजों के लिए जिले में क्रिटिकल केयर ब्लॉक बनाने की योजना ठंडे बस्ते में चली गई है। इस ब्लॉक के निर्माण के लिए मेडिकल कॉलेज प्रशासन अब तक जमीन चिह्नित नहीं कर पाया है।
प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन के तहत इस ब्लाॅक के निर्माण से लोगों को काफी राहत मिलती। गंभीर रूप में भर्ती लावारिस मरीजाें को भी इसका लाभ मिलता।
अति पिछड़े सोनभद्र जिले में स्वास्थ्य सेवाओंं को सुदृढ़ बनाने के लिए वर्ष 2022 में जिला अस्पताल परिसर या आसपास 50 बेड के क्रिटिकल केयर ब्लॉक के निर्माण का निर्णय था।
जनवरी 2023 में जिला स्तर पर क्रिटिकल केयर ब्लाॅक के निर्माण के लिए जमीन की तलाश शुरू की गई। पचास बेड युक्त क्रिटिकल केयर ब्लाक के निर्माण के लिए लगभग 3500 वर्ग मीटर भूमि की जरूरत है।
स्वास्थ्य विभाग के तत्कालीन अधीक्षण अभियंता राकेश त्रिपाठी ने जिला अस्पताल के सीएमएस को पत्र लिखकर उपलब्ध भूमि का विवरण ले-आउट प्लान सहित सूचना महानिदेशालय को उपलब्ध कराने को कहा था।
इस बीच जिला अस्पताल मेडिकल कॉलेज के अधीन आ गया। इसके बाद प्रबंधन ने इस प्रकार के ब्लॉक की आवश्यकता न होने की बात कहते हुए स्थापना से हाथ खड़े कर लिए। स्थिति यह रही कि करीब ढाई साल बाद भी विभाग जमीन को चिह्नित नहीं कर सका।
प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन के तहत इस ब्लाक के निर्माण न होने से अभी भी गंभीर मरीजों को वाराणसी रेफर किया जा रहा है। मेडिकल कालेज के अधीन अस्पताल में लावारिस मरीजाें के लिए कोई वार्ड नहीं हैं।
जिले में बनने वाले 50 बेड के क्रिटिकल केयर ब्लॉक के लिए पूर्व में जमीन चिह्नित करने के निर्देश मिले थे। जिला अस्पताल के मेडिकल काॅलेज के अधीन आने के बाद प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी। काॅलेज की ओर से इस तरह की जरूरत न होने की बात कही गई है।
- डॉ. अश्वनी कुमार, सीएमओ।
मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही है। किसी मरीज को असुविधा की कोई शिकायत नहीं है।
-प्रो.सुरेश कुमार, प्राचार्य मेडिकल काॅलेज।