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गोल्डेन ऑवर में छोटी सी मदद भी घायल के लिए अहम

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सोनभद्र। तेज रफ्तार जिंदगी में हादसों की संख्या भी बढ़ती जा रही है। आए दिन सड़क हादसों में लोग जान गंवा रहे हैं। कइयों की मौत मौके पर हो जाती है तो कुछ समय से उपचार न मिल पाने के कारण जिंदगी की जंग हार जाते हैं। ऐसी कई जिंदगियों को हम सिर्फ थोड़ी सावधानी बरत कर बचा सकते हैं। डॉक्टरों के मुताबिक किसी भी घटना के बाद का एक घंटा ही गोल्डेन ऑवर होता है। इस गोल्डेन ऑवर में पहुंचाई गई मदद ही मरीज के लिए अहम हो जाती है। अगर समय से सही मदद मिल जाय तो घायलों की जिंदगी बचाई जा सकती है। हालांकि कई बार लोग कानूनी पचड़े में फंसने के भ्रम में मदद के लिए आगे नहीं आते। उनकी अज्ञानता किसी बच्चे के सिर से पिता का साया छीन लेती है तो किसी के बुढ़ापे की लाठी तोड़ देती है। घायलों की मदद के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए ही हर साल वर्ल्ड ट्रामा डे मनाया जाता है। मन के वहम को दूर कर घायलों की जान बचाने के लिए इस दिवस पर प्रण से नई शुरुआत करें।
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फैक्चर होने पर लकड़ी के सहारे कपड़े से बांधे
सबसे पहले दुर्घटना से बचने के लिए हेलमेट और सीट बेल्ट का प्रयोग करें। सिर में चोट के कारण ही अधिकांश लोगों की जान जाती है। हादसा होने पर मरीज को अस्पताल पहुंचने में जितना समय लगता है, उसके बचने की उम्मीद उतनी ही कम हो जाती है। लिहाजा जागरूक होकर मदद के लिए आगे आना चाहिए। फैक्चर होने पर उसे किसी लकड़ी के सहारे कपड़े से बांध दें। अधिक चोट पर किसी भी नजदीकी अस्पताल में पहुंच कर प्राथमिक उपचार शुरू करें। खून का रुकना जरूरी है। -डॉ. अखिलेश पटेल, हड्डी रोग विशेषज्ञ।
खून बहना रोकें, सिर में चोट पर सीटी स्कैन कराएं
कुछ मामलों में हादसे के बाद कुछ लोगों को सदमा लग जाता है। ऐसी स्थिति में रक्त संचार अवरुद्ध होने से भी हृदय की गति प्रभावित होकर बिगड़ जाती है। इस स्थिति में अगले कुछ मिनट का समय बेहद कीमती होता है। इसे गंवाएं नहीं। सिर में चोट लगने के छह घंटे के अंदर सीटी स्कैन कराएं। सिर की चोट खतरनाक होती है। शरीर के जिस हिस्से में चोट लगे, उसे कपड़े से बांध दें ताकि खून बंद हो। यह भी ध्यान रखें कि वह हिस्सा हिले-डुले नहीं। जितना जल्द घायल अस्पताल पहुंचेगा उतना बेहतर होगा। -डॉ. प्रमोद प्रजापति, हड्डी रोग विशेषज्ञ।
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घायल की मदद करें, पुलिस नहीं करती परेशान
सड़क दुर्घटना में घायलों की मदद करने में कभी पीछे ना हटें। यह ना सोचें की बाद में उन्हें कोई परेशानी हो सकती है। ऐसा बिल्कुल नहीं होता। मोटर वाहन संशोधन अधिनियम 2019 के तहत सड़क हादसे में घायल व्यक्ति को अस्पताल पहुंचाने वाले व्यक्ति को उस घटना के लिए किसी भी तरीके कोई केस नहीं होगा। अस्पताल पहुंचने से पहले ही घायल व्यक्ति की मौत हो जाए तो भी पहुंचाने की कोशिश करने वाले व्यक्ति पर कोई मामला नहीं चलाया जाता। घायलों को तुरंत अस्पताल लें जाएं। एंबुलेंस की सहायता ले सकते हैं। जरूरत हो तो पुलिस हेल्प लाइन से भी संपर्क कर सकते हैं। मदद के रूप में आप का एक प्रयास किसी के चेहरे पर खुशी ला सकता है। बेहतर कार्य पर पुलिस की ओर से हर साल पुरस्कार भी दिया जाता है। -राहुल पांडेय, सीओ, सिटी।
यह भी जरूरी
यातायात प्रभारी प्रमोद यादव के अनुसार यातायात नियमों का पालन करते हुए वाहन ना चालएं। हेलमेट व सीट बेल्ट का प्रयोग करें। सड़क पार करने से पूर्व दोनों ओर देखें, घूमते समय इंडीकेटर का इस्तेमाल करें। शराब का सेवन कर वाहन ना चलाएं। दुर्घटना में घायलों की मदद करें।
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