राज्य कर्मचारी का दर्जा दिलाए जाने और बकाया वेतन के भुगतान की मांग को लेकर उत्तर प्रदेश ग्राम रोजगार सेवकों ने गुरुवार को कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन किया। इसके पहले बांह में काली पट्टी बांधकर राबर्ट्सगंज ब्लाक से पैदल मार्च करते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचे। रोजगार सेवकों ने कहा कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी जाती है तो आगामी विधानसभा चुनाव 2017 में सपा सरकार को इसका खामियाजा भुगतना होगा।
जिलाध्यक्ष प्रभात सिंह चंदेल ने कहा कि सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव ने वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव के दौरान ग्राम रोजगार सेवकों को नियमित कर राज्य कर्मचारी का दर्जा दिलाए जाने का आश्वासन दिया था। लेकिन सरकार बनने के बाद सपा मुखिया और प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव अपना वादा पूरा करने के बजाय रोजगार सेवकों पर लाठी चलवा रहे हैं। कहा कि अगर रोजगार सेवकों की मांग पूरी नहीं हुई तो इसका खामियाजा सरकार को आगामी विधान सभा 2017 के चुनाव में भुगतना होगा। वक्ताओं ने कहा कि दो साल से मानदेय का भुगतान न होने और रोजगार सेवकों की बदहाल स्थिति के लिए प्रदेश सरकार जिम्मेदार है। मनरेगा योजना के तहत अन्य कार्यदायी संस्थाओं की ओर से कराए जा रहे कार्यों का मस्टरोल ग्राम रोजगार सेवक को जारी करने के बजाय जनपद स्तरीय और ब्लाक स्तरीय अधिकारियों की मिलीभगत से अनधिकृत लोगों से कराया जा रहा है। यह मनरेगा गाइड लाइन तथा शासन की मंशा के विपरीत है। क्योंकि शासनादेश के अनुसार मनरेगा के तहत ग्राम पंचायत स्तर पर किसी भी कार्यदायी संस्था की ओर से कराए जा रहे कार्यों की मानीटरिंग ग्राम रोजगार सेवक के जरिए कराया जाना है। वक्ताओं ने कहा कि 20 अगस्त को लखनऊ में महारैली के उपरांत ग्राम रोजगार सेवक विधान सभा का घेराव करेंगे। इसके अलावा अगर मांग पूरी नहीं होती है तो रोजगार सेवक अब चुप नहीं बैठने वाले हैं। जरूरत पड़ी तो ब्लाक मुख्यालयों पर तालाबंदी करके विकास भवन पर प्रदर्शन किया जाएगा। इस मौके पर दिवाकर तिवारी, वीरेंद्र कुमार आदि शामिल रहे।