पूर्वांचल राज्य जनमोर्चा की ओर से सोमवार को हिंदी दिवस पर तहसील परिसर स्थित अधिवक्ता भवन में कार्यक्रम हुआ। वरिष्ठ अधिवक्ता अमित वर्मा की अध्यक्षता में हुए कार्यक्रम में पूर्वांचल राज्य के गठन का संकल्प दोहराया गया।
वक्ताओं ने कहा कि हिंदी देश की एकता, संस्कृति और जनभावनाओं को जोड़ने वाली भाषा है। इसके प्रचार-प्रसार के साथ ही राजकाज में हिंदी के अधिकाधिक प्रयोग पर जोर दिया जाना चाहिए। मोर्चा के महासचिव वरिष्ठ अधिवक्ता पवन कुमार सिंह ने कहा कि हिंदी हमारे स्वाभिमान और सांस्कृतिक पहचान की भाषा है। हिंदी दिवस केवल एक दिन हिंदी को याद करने का अवसर नहीं, बल्कि पूरे वर्ष इसके सम्मान और व्यावहारिक प्रयोग का संकल्प लेने का दिन है। राष्ट्रीय सचिव राजेश यादव ने कहा कि पूर्वांचल की जनता लंबे समय से रोजगार के अवसरों की कमी का सामना कर रही है। अलग राज्य बनने से क्षेत्र की समस्याओं का स्थानीय स्तर पर बेहतर समाधान संभव होगा। संचालन डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन के पूर्व महामंत्री प्रदीप कुमार मौर्य ने किया। इस दौरान रमेश चंद्र सिंह, विमल प्रसाद सिंह, टीटू प्रसाद गुप्ता, शाहनवाज आलम खान, राजकुमार पटेल, आदर्श देव पांडेय, शिवानंद सागर, अनुराग पांडेय, सुरेश कुमार सिंह और अभिषेक मौर्य आदि मौजूद रहे।
कविता के शब्दों में हिंदी का गौरव उकेरा
हिंदी दिवस पर सोमवार को जिले के शिक्षण संस्थानों में हिंदी पर निबंध, कविता लेखन और भाषण प्रतियोगिता हुई। इसमें छात्र-छात्राओं ने उत्साह से हिस्सा लेते हुए राजभाषा के गौरव और सम्मान की रक्षा करते हुए उसे समृद्ध करने का संकल्प दोहराया।
अटल आवासीय विद्यालय गुरमुरा में हिंदी पखवाड़े का शुभारंभ हुआ। यहां विद्यार्थियों को हिंदी की समृद्ध साहित्यिक विरासत एवं जीवन में उसके महत्व से परिचित कराया गया। वहीं एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय पीपरखाड़ कोन और पीएम श्री राजकीय इंटर कॉलेज शक्तिनगर में हिंदी दिवस उल्लास एवं उत्साह के साथ मनाया गया। विद्यार्थियों ने कविता गायन, कहानी वाचन, पोस्टर निर्माण, नाटक एवं साहित्यिक-सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से अपनी प्रतिभा, कल्पनाशीलता और अभिव्यक्ति क्षमता का शानदार प्रदर्शन किया। किसी ने कविता के शब्दों में हिंदी का गौरव उकेरा, तो किसी ने कहानी और अभिनय के माध्यम से हिंदी की महत्ता का संदेश दिया। विद्यार्थियों द्वारा तैयार आकर्षक पोस्टरों ने भी हिंदी के प्रति प्रेम, सम्मान और जागरूकता की भावना को प्रभावी ढंग से अभिव्यक्त किया। वक्ताओं ने कहा कि हिंदी हमारी भाषा ही नहीं, हमारी संस्कृति, विचार और अभिव्यक्ति की सशक्त पहचान है। कार्यक्रम में हिंदी के संरक्षण, संवर्धन और दैनिक जीवन में अधिकाधिक प्रयोग का संदेश दिया गया।