सूबे में बिजली की मांग बढ़कर 22 हजार मेगावाट के पार पहुंच गई है। ऐसे में उत्पादन निगम व निजी क्षेत्र की सभी इकाइयों के उत्पादनरत होने के बाद भी प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में बेतहाशा विद्युत कटौती करनी पड़ी।
मई के प्रारंभ से ही प्रदेश में आंधी-पानी का दौर शुरू होने के कारण तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई थी। पूरे माह में सिर्फ एक बार बिजली की मांग 20 हजार मेगावाट पहुंच पाया था। इस दौरान हिंद महासागर व बंगाल की खाड़ी में उठे ताउते व यास तूफान के कारण बिजली की अधिकतम मांग 15 हजार मेगावाट तक पहुंच गई थी, लेकिन जून महीने के प्रारंभ से ही गर्मी के जोर पकड़ लेने से बिजली की मांग में इजाफा होना प्रारंभ हो गया। सोमवार को बिजली की अधिकतम मांग 22029 मेगावाट दर्ज की गई। इस दौरान न्यूनतम मांग भी 11759 मेगावाट रही। पारीछा ए को छोड़कर उत्पादन निगम की सभी इकाइयों से विद्युत उत्पादन शुरू हो जाने से निगम का उत्पादन पिछले दो माह के उच्चतम स्तर 3138 मेगावाट पहुंच गया। इसके बाद भी प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में आपात कटौती करनी पड़ी। मौसम के मिजाज को देखते हुए बिजली की मांग में और इजाफा होने की संभावना जताई जा रही है।