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एक सप्ताह में दूसरी बार बिजली की मांग 26 हजार मेगावाट पार

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सूबे में बिजली की मांग एक बार फिर 26 हजार मेगावाट को पार कर गई है। कुछ दिनों पूर्व भी मांग 26 हजार के पार पहुंच गई थी लेकिन उसके बाद मांग में गिरावट देखी जा रही थी। बढ़ती मांग को देखते हुए इस वर्ष अधिकतम मांग 27 हजार तक पहुंचने की संभावना जताई जा रही हैं।
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कोयला संकट के बीच सूबे में बिजली की मांग बढ़ती ही जा रही है। गर्मी के प्रकोप से लोग एसी-कूलर, फ्रिज जैसे उपकरणों का खूब उपयोग कर रहे हैं। यही कारण है कि बिजली की अधिकतम मांग ने दोबारा से 26 हजार मेगावाट का आंकड़ा पार कर लिया है। पिछले बुधवार को मांग के आंकड़े ने तेजी से बढ़ते हुए 26 हजार के आंकड़े को पार किया था। इसके बाद अगले ही दिन आई मांग में 525 मेगावाट की गिरावट से आंकड़ा दोबारा 25 हजार के अंदर आ गया था। वहीं रविवार को मांग एक बार फिर बढ़ी तो आंकड़ा 26094 मेगावाट दर्ज किया गया। अधिकतम मांग के बढ़ने के साथ ही न्यूनतम मांग में थोड़ी गिरावट हुई है। 19 हजार मेवा को पार कर चुकी बिजली की न्यूनतम मांग 18716 मेवा दर्ज की गई।
हरदुआगंज इकाई से प्रारंभ हुआ उत्पादन
लंबे समय से बंद हरदुआगंज की 105 मेवा इकाई से रविवार से उत्पादन शुरू हो गया। बढ़ती गर्मी और लगातार बढ़ती बिजली की मांग के बाद प्रारंभ हुई इकाई ने रविवार को 75 मेगावाट बिजली उत्पादन किया। वहीं हरदुआगंज के साथ ही बंद हुई पारीछा की एक इकाई से उत्पादन अब तक शून्य बना हुआ है।
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ओबरा की एक इकाई से उत्पादन शून्य
शनिवार से ओबरा तापीय परियोजना की 12 नंबर यूनिट से उत्पादन शून्य हो गया। ओबरा परियोजना के सीजीएम इं. दीपक कुमार ने बताया कि इकाई को ईएसपी मेंटेनेंस (स्थिरता नियंत्रण) के कारण तीन दिनों के लिए बंद किया गया है। मरम्मत का कार्य जारी है। सोमवार तक इकाई की मरम्मत कर इन्हें दोबारा उत्पादनरत करने का प्रयास जारी है।
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