एयरपोर्ट अथारिटी ऑफ इंडिया (एएआई) को म्योरपुर एयरपोर्ट के संचालन का जिम्मा सौंपे जाने के साथ ही इसके निर्माण में आ रही बाधाओं को दूर कराने की कवायद भी तेज हो गई है। डीएम ने दुद्धी तहसील प्रशासन और पीडब्लूडी के अफसरों को जमीन से जुड़े विवाद का शीघ्र समाधान का निर्देश दिया है। रनवे और टर्मिनल के काम में भी तेजी लाने को कहा गया है। साल के अंत तक हर हाल में एयरपोर्ट से उड़ानें आरंभ करने का लक्ष्य रखा गया है। यहां से उड़ान शुरू होने के बाद सोनभद्र के साथ ही पड़ोसी राज्य मप्र, छग और झारखंड के सीमावर्ती जिलों की बड़ी आबादी को लाभ मिलेगा।
केंद्र सरकार की रिजनल कनेक्टिविटी योजना के तहत म्योरपुर में स्थित हवाई पट्टी का विस्तार किया जा रहा है। इस एयरपोर्ट को एयर बस ए-320 के मानकों के तहत विकसित किया जा रहा है। राज्य सरकार ने इसके संचालन की जिम्मेदारी एयरपोर्ट अथारिटी ऑफ इंडिया को सौंपी है। इसके लिए शुक्रवार को एमओयू भी साइन हुआ है। एमओयू के बाद अब एयरपोर्ट के लाइसेंस की प्रक्रिया शुरू होगी। उधर, एयरपोर्ट के निर्माण को गति देने में भी अफसर जुट गए हैं। मौजूदा समय में एयरपोर्ट के निर्माण में जमीन विवाद ही सबसे बड़ी बाधा साबित हो रहा है। पार्किंग और टर्मिनल एरिया के हिस्से की करीब साढ़े तीन बीघा जमीन पर स्वामित्व को लेकर मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन है। इसका समाधान निकलता इससे पहले ही पास के कुछ किसानों ने बाउंड्री में भी अवरोध खड़ा कर दिया है। पिछले दिनों तहसील प्रशासन की टीम ने विवाद के समाधान के लिए सर्वे भी किया था। बाउंड्री के ही कुछ हिस्से में किसानों का अतिक्रमण अब तक नहीं हटा है, जबकि इसका मुआवजा भी उन्हें दिया जा चुका है। राजस्व कर्मचारियों की लापरवाही से लंबित हो रहे मामले को डीएम ने गंभीरता से लिया है। उन्होंने तहसील प्रशासन को शीघ्र ही विवादों का समाधान कराने के निर्देश दिए हैं। इस संबंध में उन्होंने एयरपोर्ट अथारिटी ऑफ इंडिया के अफसरों से भी वार्ता की है। उन्हें भरोसा दिलाया है कि शीघ्र ही जमीन से जुड़े विवादों का हल कराया जाएगा।