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इलाज के नाम पर गरीबों का किया जा रहा आर्थिक शोषण

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चोपन। स्थानीय विकास खंड अंतर्गत ग्रामीण अंचलों सहित जिले के लगभग हर जगह इस समय मलेरिया, टाइफाइड एवं बदलते मौसम की वजह से सर्दी जुकाम खांसी आदि जैसी बीमारी तेजी से अपना पैर फैलाना शुरू कर दिया है। वही वैश्विक महामारी कोविड-19 के मद्देनजर प्रदेश सरकार ने सभी सरकारी अस्पतालों में संचालित ओपीडी सेवाएं पूरी तरह से बंद कर दी है, जिसका परिणाम यह हो रहा है की ग्रामीण अंचलों के लोग मलेरिया, टाइफाइड, सर्दी जुकाम खांसी जैसी बीमारियों से परेशान हैं। मजबूरन उनको गांव में ही झोलाछाप के यहां इलाज कराना पड़ रहा है। जहां एक तरफ ग्रामीण आदिवासियों के लिए झोलाछाप इस समय किसी भगवान से कम नहीं महसूस हो रहे हैं तो वहीं झोलाछाप मनमानी फीस भी वसूल रहे हैं। ओपीडी सेवाएं बंद करने के बाद सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र चोपन सहित अन्य केंद्रों पर एक नंबर जारी किया गया था, जिससे मरीजों को होने वाली समस्याओं के बारे में जानकारी लेकर डॉक्टर के सलाह से मेडिकल स्टोर से दवा प्राप्त कर सकें और इलाज करा सकें लेकिन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र चोपन में नंबर तो जारी हो गया, लेकिन सही तरीके से प्रचार-प्रसार न होने के कारण उस नंबर का लाभ जो मिलना चाहिए था वह प्राप्त नहीं हो पा रहा है। सरकारी अस्पतालों के ओपीडी बंद होने से सेमिया, घोरिया, नेवारी, भरहरी, जुगैल, चौरा बिजौरा, अगोरी, कुरछा चतरवार, बरगंवा, टापू, महलपूर चोपन, सिंदुरिया, बर्दिया आदि गांवों के लोग झोलाछाप का सहारा ले रहे हैं। श्रीराम, अंगद, मनोज आदि ग्रामीणों ने कहा कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र द्वारा जारी नंबरों का सही से प्रचार प्रसार किया जाए ताकि लोग उसका लाभ प्राप्त कर सके।
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