जिले की करीब सात हजार प्रसूताओं को जननी सुरक्षा योजना का लाभ नहीं मिला। 48 घंटे में लाभ मिलने के तय मियाद से इतर इंतजार में एक साल गुजर गए। प्रसूताओं का बैंक खाता न खुलने से यह संकट पैदा हुआ, लेकिन महकमे के जिम्मेदार इस बड़ी समस्या का अब तक हल नहीं निकाल सके। इससे सात हजार प्रसूताओं को करीब 98 लाख रुपये स्वास्थ्य विभाग के खाते में डंप पड़ा है और महिलायें पीएचसी, सीएचसी का चक्कर काट रही हैं। जबकि खाता खोलवाने के लिए जिम्मेदारों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
दरअसल देश में बढ़ते शिशु एवं मातृ मृत्यु दर पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए भारत सरकार ने संस्थागत प्रसव बढ़ाने का फैसला लिया था। इसके लिए उन प्रसूताओं को प्रोत्साहन राशि 14 सौ रुपये देने की योजना तैयार हुई, जिनका प्रसव सरकारी अस्पतालों या प्रसवोत्तर केंद्र पर होगा। योजना का खासा असर हुआ। संस्थागत प्रसव बढ़ा और मातृ एवं शिशु मृत्यु दर घटी। प्रसूताओं को प्रोत्साहन राशि भी मिली। लेकिन पिछले एक साल से प्रोत्साहन राशि बमुश्किल ही लोगों को मिल पा रही है।
इसके पीछे वजह प्रसूताओं का खाता न खुलना है। पहले चेक से भुगतान होता था। लेकिन जबसे खाते में सीधे प्रोत्साहन राशि भेजने की प्रक्रिया शुरू हुई, लाभार्थियों की परेशानी बढ़ गई। पूर्व में आशाओं और एएनएम को सीएमओ ने निर्देश दिया था की महिलाओं के गर्भवती होने पर ही वे उनका खाता खोलवाने की प्रक्रिया शुरू कर दें ताकि प्रसव के तत्काल बाद प्रसूताओं के खाते में पैसा भेजा जा सके। लेकिन ऐसा नहीं हुआ।