सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने का झांसा देकर वसूली का नया मामला सामने आया है। मकानों की नंबरिंग के नाम पर ग्रामीणों से 50 से 100 रुपये वसूले जा रहे हैं। पैसे लेने के बाद लोगों को एक नंबर दिया जा रहा है और उसे ही पते की पहचान बताकर सरकारी योजनाओं से जोड़ने की बात कही जा रही है।
वसूली करने वाले इसे डीपीआरओ कार्यालय का आदेश बता रहे हैं, जबकि वहां से ऐसा कोई पत्र ही जारी नहीं हुआ है। रॉबर्ट्सगंज ब्लॉक के सलखन, करमा ब्लॉक के गड़ईगाड सहित कई गांवों में प्रधानों, सचिवों को पत्र जारी कर हर घर पर नंबर बोर्ड लगवाने को कहा गया है।
यह दलील दी गई है कि इससे गांव में मकानों की सही गिनती हो पाएगी और ग्रामीणों को योजनाओं का लाभ पाने में सहूलियत मिलेगी। इसके एवज में प्रत्येक मकान से 50 से 100 रुपये लेने को भी कहा गया है। दिए जा रहे बोर्ड पर पर्यावरण एवं जल संरक्षण मिशन अंकित है तो कहीं आत्मनिर्भर पंचायत और आत्मनिर्भर प्रदेश का।
स्वच्छ भारत अभियान, पीएम आवास सहित अन्य योजनाओं के स्लोगन का भी उल्लेख है। ग्रामीणों से यह कहा जा रहा है कि अगर वह बोर्ड नहीं लगवाएंगे तो उन्हें योजनाओं के लाभ से भी वंचित होना पड़ सकता है। डीपीआरओ कार्यालय का आदेश बताकर कई गांवों से हजारों रुपये की वसूली की जा चुकी है।
अकेले सलखन ग्राम पंचायत में ही करीब 300 घरों को नंबरिंग वाले बोर्ड बांटे जा चुके हैं। अन्य गांवों में भी इसे लेने के लिए लगातार दबाव दिया जा रहा है। खेती, मजदूरी कर परिवार का भरण पोषण करने वाले ग्रामीण इस वसूली से परेशान है। असंतोष बढ़ने के बाद ग्राम प्रधानों के सामने भी मुश्किल बढ़ गई है।
ऐसा कोई भी पत्र या निर्देश मेरी ओर से जारी नहीं हुआ है। सलखन गांव में कुछ लोगों के माध्यम से नंबर बोर्ड लगाने के नाम पर वसूली की बात सामने आई थी। तत्काल इस पर रोक लगा दी गई है। दो दिन में सभी ग्रामीणों को पैसे वापस करने के भी निर्देश दिए गए हैं। मामले की जांच कराकर इसमें संलिप्त लोगों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।
-नमिता शरण, जिला पंचायत राज अधिकारी।