चतरा ब्लॉक क्षेत्र स्थित विसर्जन स्थल धधरौल बांध।
सोनभद्र। गणेश पूजा, सरस्वती, पूजा, विश्वकर्मा पूजा और दुर्गा पूजा के बाद धंधरौल, डोगिया जलाशयों, तालाबों में प्रतिमाओं के विसर्जन से जलीय जीवों का अस्तित्व खतरे में पडने लगा है। मूर्तियों के कचरे, उनको बनाने में इस्तेमाल होने वाली वस्तुएं, रासायनिक रंगों के कारण मछली समेत अन्य जलीय जीव जान गंवा रहे हैं। बावजूद इसके प्रशासन जहां प्रतिमाओं का विसर्जन हुआ है उनमें से मूर्तियों का अवशेष निकालने के लिए कोई इंतजाम नहीं किया है।
शारदीय नवरात्र में शहरी और ग्रामीण इलाकों में 272 जगहों पर मां दुर्गा समेत अन्य देवी-देवताओं की प्रतिमाएं स्थापित की गई थी। दशहरा पर्व के अगले दिन राबर्ट्सगंज नगर, नई बाजार, चतरा, रामगढ़ समेत अन्य गांवों की मां दुर्गा समेत अन्य देवी-देवताओं का स्थापित प्रतिमाओं को धंधरौल बांध में विसर्जित किया गया है। सुकृत, मधुपुर क्षेत्र की डोगिया जलाशय, मारकुंडी की बलुई बंधी, सलखन की घाघर नदी, ओबरा की खैरटिया जलाशय, शाहगंज की ढूटेर तालाब, खलियारी कस्बे समेत अन्य गांवों की खलियारी के प्राचीन तालाब, बीजपुर की रिहंद जलाशय, दुद्धी की नगर के प्राचीन तालाब, घोरावल नगर में स्थित हरिहवा तालाब, केकराही क्षेत्र की घाघर मुख्य नहर, परासपानी में स्थित तालाब, वैनी क्षेत्र का बंधी बघ नरवा नाला, चोपन का चोपन में स्थित तालाब में मूर्तियों को विर्सजित किया गया है। कई दिन बीत जाने के बाद भी मूर्तियों के अवशेष को बाहर निकालने का इंतजाम नहीं किया जा सका है। इससे जलीय जीव के जान पर खतरा मंडरा लगाने लगा है। इस संबंध में मत्स्य अधिकारी विजय पाल ने कहा कि मूर्तियों को बनाने में प्रयोग होने वाले रासायनिक रंगों के कारण जलीय जीव के जान को खतरा होता है। लेकिन अभी तक कहीं से जलीव जीव के नुकसान की सूचना नहीं है। शासन और जिला प्रशासन की ओर से उन्हें मूर्तियों के अवशेष की सफाई कराने के लिए कोई बजट नहीं मिला है।