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Sonebhadra News: पेयजल परियोजनाएं अधूरी, बांधों में पानी कम, गहराएगा पेयजल संकट

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सोनभद्र। गर्मी बढ़ने के साथ ही जिले में पेयजल की चुनौती बढ़ती जा रही है। कुंआ, तालाब और हैंडपंपों का जलस्तर खिसक रहा है तो पेयजल परियोजनाओं की हालत भी खस्ता है। मार्च 2023 तक पूरी होने वाली नमामि गंगे योजना की अधिकांश पेयजल परियोजनाएं अभी अधूरी हैं। बांधों में भी सिंचाई और पशु पेयजल के लिए आरक्षित पानी ही शेष बचा है। गर्मी के शुरुआती तेवर देख अप्रैल-मई को लेकर रहवासियों की चिंता बढ़ रही है।
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पहाड़ों से घिरे जिले में हर साल गर्मी में पानी का संकट होता है। कई इलाके सामान्य दिनों में भी शुद्ध पेयजल के लिए जूझते हैं। इन समस्याओं के स्थाई समाधान के लिए सरकार ने नमामि गंगे योजना के तहत जल जीवन मिशन शुरू की है। जिले में इससे संबंधित कुल 14 पेयजल परियोजनाएं स्थापित होने हैं। नवंबर 2020 में धंधरौल बांध के समीप पीएम ने इन परियोजनाओं का शिलान्यास किया था। करीब 2892 करोड़ लागत वाली इन परियोजनाओं से जिले के 1441 गांवों तक शुद्ध पानी पहुंचाने का लक्ष्य है। इन परियोजनाओं को कई बार विस्तार के बाद मार्च 2023 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है। लोगों को उम्मीद थी कि इस बार गर्मी में उन्हें पेयजल संकट से नहीं जूझना होगा। लेकिन अधिकांश परियोजनाएं अधूरी हैं। सिर्फ केवधा और कदरा की परियोजना को ही टेस्टिंग के साथ कुछ इलाकों में शुरू किया गया है। भूमि विवाद के कारण पटवध परियोजना की शुरुआत में विलंब हुआ था। अन्य 11 परियोजनाओं का काम भी काफी सुस्त है।
जल जीवन मिशन से इन पर हो रहा काम
सबसे अधिक 661 राजस्व गांवों के 6.90 लाख लोग पटवध पेयजल पाइप परियोजना से लाभान्वित होने हैं। इसी तरह हर्रा ग्राम समूह पेयजल योजना से 44 राजस्व गांवों के 96 हजार, केवधा योजना से 13 राजस्व गांवों के 50 हजार, बेलाही से 233 गांवों के 1.60 लाख, गुरमुरा से 9 गांवों के 60 हजार, तेंदुआही पेयजल योजना से 88 गांवों के 75 हजार, नगवां से 46 गांवों के 41 हजार, पनारी से 6 गांवों के 45 हजार, कदरा से 6 गांवों के 12 हजार लाभान्वित होंगे। नेवारी ग्राम समूह पाइप पेयजल योजना से 12 गांवों के 27 हजार, परासी से 37 गांवों के दो लाख, अमवार से 65 गांवों के 1.30 लाख, बीजपुर से 3 गांवों के 15 हजार, झीलो योजना से 166 गांवों के साढ़े तीन लाख लोगों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध होने का लक्ष्य है। इसके लिए 139 ओवरहेड टैंक का निर्माण होना है।
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कनहर बांध पर टिकी है अमवार परियोजना
अमवार पेयजल परियोजना कनहर बांध पर आधारित है। परियोजना को बांध से ही पानी मिलना है, जिसे शोधित कर जलापूर्ति की जाएगी। कनहर बांध का निर्माण ही अभी पूरा नहीं हुआ है। जून तक बांध बांधने का लक्ष्य है। लिहाजा तब तक इस परियोजना के चालू होने की भी उम्मीद नहीं है। सबसे बड़ी झीलो परियोजना में भी 25 फीसदी से अधिक काम शेष है। बेलाही परियोजना धंधरौल बांध पर आधारित है। इसका काम काफी हद तक पूरा हो चुका है, मगर बांध में ही पानी का अभाव है। गत वर्ष पर्याप्त बारिश न होने से धंधरौल बांध भर नहीं पाया था। इस बांध से बढ़ौली-कुसाही और राबर्ट्सगंज पेयजल पुर्नगठन परियोजना भी निर्भर है। पर्याप्त पानी के अभाव में इन क्षेत्रों में जलापूर्ति की चुनौती है।
पशु पेयजल के लिए सुरक्षित रखा गया है पानी
सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता राजीव कुमार ने धधरौल बांध में मार्च में 15 फीट पानी होना चहिए, लेकिन इस समय 12 फीट पानी है। वहीं नगवां बांध में 25 फीट के सापेक्ष 27 फीट पानी है। यह पानी गर्मी के लिए आरक्षित रखा गया है। एक-दो बार नहरों को खोलकर गर्मी में पशुओं को और जलस्तर को बनाए रखने के लिए नहर कम क्षमता से खोली जाएगी।
जमीन विवाद, एनओसी व अन्य कारणों से कुछ परियोजना के काम में देरी हुई है। ज्यादातर परियोजनाओं का काम अंतिम चरण में हैं। कार्य की नियमित निगरानी की जा रही है। कार्यदाई संस्थाओं को जल्द काम पूरा करने को कहा गया है। - आशुतोष दुबे, एडीएम, नमामि गंगे।
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