सोनभद्र। चोपन-चुनार रेलखंड के दोहरीकरण की मंजूरी ने सोनांचल की तरक्की का रास्ता भी खोल दिया है। इस परियोजना के पूरा होने से प्रदेश की कई तापीय परियोजनाओं तक एनसीएल का कोयला पहुंचाने में सहूलियत मिलेगी। माल ढुलाई आसान होगी तो यात्री सुविधाओं का भी विस्तार होने की उम्मीद जगी है। लंबे समय से लोग इस रूट पर यात्री ट्रेनों की संख्या बढ़ाने की मांग करते आ रहे हैं, मगर सिंगल लाइन होने से उनकी मांगों को बल नहीं मिल पा रहा था।
उत्तर मध्य रेलवे के प्रयागराज मंडल के चुनार-चोपन खंड का दोहरीकरण कार्य 1423.96 करोड़ रुपये से होना है। पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन (मुगलसराय) यार्ड के अत्यधिक व्यस्त होने के कारण उत्तर रेलवे ने करनपुरा कोयला क्षेत्रों के लिए वैकल्पिक मार्ग के रूप में चुनार-चोपन खंड का निर्माण शुरू किया था।
मुख्य लाइन पर चुनार से रॉबर्ट्सगंज-चुर्क तक का खंड 14 जुलाई 1954 को खोला गया था। इसे आगे गढ़वा रोड तक बढ़ाया गया था, मगर चोपन से ठीक पहले सोन नदी पर एक पुल की आवश्यकता थी। पुल निर्माण के बाद अंतत: यह लाइन 19 अक्टूबर 1963 को खोली गई। वर्तमान में इस लाइन से यूपी के सबसे पिछड़े एवं तीन राज्यों से जुड़े आदिवासी बहुल जिले सोनभद्र एवं मीरजापुर के 2054 गांव, 6788 वर्ग किमी क्षेत्रफल और लगभग 25 लाख की आबादी को को लाभ मिलता है। यह रेल लाइन हावड़ा से दिल्ली को जोड़ने वाले मुख्य मार्ग को राष्ट्र के ऊर्जांचल से जोड़ता है।
पीडीडीयू के रास्ते सिंगरौली से चुनार की दूरी 230 किमी है, जबकि चोपन के माध्यम से सिंगरौली से चुनार की दूरी तक की दूरी मात्र 167 किमी है। यह परियोजना सिंगरौली क्षेत्र से कोयला रैक की आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। चुनार-चोपन खंड के दोहरीकरण से यात्रा के समय में कमी के साथ अतिरिक्त माल ढुलाई में भी वृद्धि होगी। चुनार-चोपन सेक्शन एक सिंगल लाइन सेक्शन होने के कारण इस पर वर्तमान में प्रति दिन 20 से 22 मालगाड़ी और 14 कोचिंग ट्रेनों का संचालन होता है। इस अनुभाग की लाइन क्षमता उपयोग 214 प्रतिशत है। डीएफसीसीआईएल के चालू होने के बाद इस खंड पर यातायात तेजी से बढ़ रहा है। इसे पूरा करने और हाई डेंसिटी नेटवर्क मार्ग पर भीड़भाड़ कम करने के लिए चुनार-चोपन के दोहरीकरण की तत्काल आवश्यकता थी।
नौ तापीय परियोजनाओं तक कोयला पहुंचाने में मिलेगी मदद
वर्तमान में मेजा ऊर्जा निगम प्राइवेट लिमिटेड, प्रयागराज पावर जेनरेशन कंपनी लिमिटेड, पनकी पावर हाउस, हरदुआगंज पावर हाउस और एनसीआर का एनटीपीसी दादरी पावर हाउस तक कोयला सिंगरौली से जाता है। रेल लाइन दोहरीकरण के बाद इन परियोजनाओं के अलावा घाटमपुर, जवाहरपुर, विस्तारित हरदुआगंज और खुर्जा तापीय बिजली परियोजना तक भी कोयला पहुंचाने में काफी किफायती साबित होगा।
झारखंड और छत्तीसगढ़ से सीधे जुड़ेंगे बनारस और प्रयागराज
दोहरीकरण कार्य से उत्तर प्रदेश के वाराणसी और प्रयागराज क्षेत्र झारखंड और छत्तीसगढ़ से सीधे जुड़ सकेगा। इन क्षेत्रों के निवासियों का आवागमन, व्यापार, रोजगार और स्वास्थ्य सहित अन्य सामाजिक, व्यक्तिगत आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए आवागमन के लिए अधिक गाड़ियों का परिचालन हो सकेगा।