बेसिक शिक्षा विभाग ने आठ शिक्षकों की नियुक्ति नियमों की अनदेखी कर की। डीएम के निर्देश पर बीएसए कार्यालय में छापेमारी करने पहुंचे अपर जिलाधिकारी रामचंद्र ने पत्रावलियों में कई खामियां पाईं और गड़बड़ी का खुलासा किया। पूछताछ के दौरान कार्यालय के दो लिपिक एक दूसरे पर ही पत्रावलियों को लेकर आरोप लगाते रहे। एडीएम ने दोनों का बयान दर्ज कराया। कहा, जांच में प्रथम दृष्टया खामियां मिली हैं। आठ शिक्षकों की नियुक्ति में गड़बड़ी है। जांच पूर्ण कर कार्रवाई की जाएगी।
यूपी सरकार ने प्रदेश में 16448 शिक्षकों की नियुक्ति का आदेश दिया था। इसके तहत जिले में 823 शिक्षकों की नियुक्ति की जानी थी। नियुक्ति की भी गई लेकिन उसमें जमकर फर्जीवाड़ा किया गया। दरअसल सिकंदर, विष्णू यादव, कुसुमलता, छोटेलाल साहू समेत अन्य ने डीएम सीबी सिंह से मिलकर शिकायत की थी कि नियुक्ति में फर्जीवाड़ा किया गया है। इस पर उन्होंने एडीएम रामचंद को जांच सौंपा था। एडीएम ने कई बार बीएसए दफ्तर से नियुक्ति संबंधी पत्रावलियों को तलब किया लेकिन उन्हें पत्रावलियां नहीं दी गईं। इसके लिए उन्होंने पत्र भी लिखा लेकिन उसकी अनदेखी कर दी गई। इस पर बुधवार को एडीएम अचानक उरमौरा स्थित बीएसए कार्यालय पर धमक पड़े।
यहां उन्होंने लिपिकों से नियुक्ति संबंधी फाइल तलब की तो लिपिक आनाकानी करने लगे। जब एडीएम सख्त हुए तो लिपिकों ने फाइल मंगाई। पत्रावलियों की जांच के दौरान जब एडीएम ने वरिष्ठ सहायक देवेश शुक्ला और राजेश जायसवाल से पूछताछ शुरू की तो दोनों एक दूसरे पर झूठ बोलने का आरोप लगाने लगे। यह देख एक बारगी एडीएम भी भौचक रह गए। फिर उन्होंने दोनों का बयान लिखित रूप से दर्ज कराया।
एडीएम ने बताया कि पत्रावलियों में जांच के दौरान पाया गया कि आठ शिक्षकों की काउंसिलिंग से जुड़ा पत्र बिल्कुल अलग दिख रहा है। इससे प्रथम दृष्टया जांच में नियुक्ति में फर्जीवाड़ा मिला है। पूरे मामले की जांच की जा रही है। यदि गड़बड़ी पाई गई तो कार्रवाई की जाएगी।