वर्ष 2017 के चुनाव में सोनभद्र के चारों विधानसभा सीटों पर कब्जे का सपना देख रही बसपा को जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव ने बड़ा झटका दिया है।
33 सदस्यों में से महज तीन मत मिलने के मामले (एक मत खुद प्रत्याशी का) ने जहां वर्ष 2005 में हुए चुनाव की याद ताजा कर दी है। वहीं जिले की राजनीति में महत्वपूर्ण दखल रहने वाले बसपा के पूर्व मंत्री केएन यादव का भी जादू विफल साबित हुआ है।
बताते चलें कि पूर्व मंत्री केएन यादव के पुत्र एवं ओबरा विधायक सुनील सिंह यादव को बसपा ने राबर्ट्सगंज विधानसभा का प्रत्याशी घोषित कर रखा है।
इसको देखते हुए इस बार के जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव बसपा के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा था। राजनीतिक विश्लेषक भी कांटे के टक्कर की संभावना जता रहे थे। पूर्व मंत्री, ओबरा विधायक खेमे के साथ ही जिलाध्यक्ष पन्नालाल सहित पार्टी के अन्य कद्दावर भी जोर-शोर से हर तरीके से पार्टी प्रत्याशी की जीत की कोशिश में लगे हुए थे, लेकिन गुुरुवार की शाम आए परिणाम ने जहां सपा प्रत्याशी के पक्ष में एकतरफा समीकरण सामने लाकर रख दिया।
वहीं बसपा के लिए यह परिणाम चौंकाने वाला रहा। वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव पर इसका क्या असर पड़ेगा? इसके बारे में अभी कुछ कहना ठीक नहीं होगा, लेकिन जिस तरह से बसपा प्रत्याशी को हार का सामना करना पड़ा है, उससे भविष्य को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
बता दें कि वर्ष 2005 में पूर्व मंत्री विजय सिंह गोंड़ खेमे के शिवशंकर घसिया के पक्ष में एकतरफा वोटिंग हुई थी। जबकि सपा के ही विधायक रहे परमेश्वर दयाल की पत्नी को करारी शिकस्त सहनी पड़ी थी।