इलाके के प्रधानों व प्रतिनिधियों ने ग्रामीणों संग रोजगार के लिए एनसीएल कृष्णशिला कोयला खदान में मंगलवार को प्रदर्शन किया। इसके चलते कई घंटे कार्य प्रभावित रहा। वहीं एनसीएल कृष्णशिला के सुरक्षा प्रभारी ने प्रधानों व उनके प्रतिनिधियों के खिलाफ तहरीर दी है। इसके चलते मामला गरम हो गया है।
आउटसोर्स के जरिये कोयला खदान का अधिभार (ओबी) हटाने का कार्य एसए यादव कंपनी कर रही है। मंगलवार सुबह कंपनी के मुख्य गेट पर रोजगार की मांग को लेकर क्षेत्र के कई गांवों के प्रधान व प्रधान प्रतिनिधियों की अगुवाई मेें पहुंचे विस्थापितों ने नारेबाजी के साथ प्रदर्शन किया। ग्राम पंचायत जमशीला, चंदुआर, घरसड़ी, कोहरौलिया, मिसरा के ग्राम प्रधान/प्रधान प्रतिनिधियों ने कंपनी मुख्य गेट को बंद कर दिया। कंपनी प्रबंधन पर मनमानी व वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए कहा कि बीते माह परियोजना गेस्ट हाउस में जिला प्रशासन, कृष्णशिला प्रबंधन व कंपनी अधिकारियों की क्षेत्रीय ग्राम प्रधानों की उपस्थिति में त्रिपक्षीय बैठक हुई थी। बैठक में तय हुआ था कि कोहरौल/कोहरौलिया के 15 हेल्पर, 10 टेक्निकल/ऑपरेटर, एक अन्य 26, जमशीला, घरसड़ी, चंदुआर, बांसी, मिसरा, गांव के पांच-पांच मिलाकर कुल 51 विस्थापितों को रोजगार दिया जाएगा। इसका लिखित आश्वासन दिया गया था। इसके बावजूद प्रबंधन ने सिर्फ छह को रोजगार दिया। शेष 45 विस्थापित/प्रभावित रोजगार के लिए भटक रहे हैं। आरोप यह भी लगाया गैर प्रांत गुजरात, आंध्र प्रदेश, बिहार, बंगाल, तमिल के लोगों को रुपये लेकर रोजगार दे दिया जा रहा है। इसमें पुलिस की भी भूूमिका है। इस दौरान मुख्य रूप से जमशीला प्रधान प्रतिनिधि कमलेश सिंह उर्फ पप्पू, कोहरौलिया प्रधान प्रतिनिधि चंदन कुमार, ओम नारायण, रामकुमार गुप्ता, योगेंद्र कुमार, प्रमोद कुमार, प्रदीप राय सहित विस्थापित/प्रभावित परिवारों से काफी संख्या में लोग मौजूद रहे। दोपहर बाद एनसीएल कृष्णशिला परियोजना प्रबंधन एवं पुलिस प्रशासन की पहल पर शुक्रवार को कंपनी प्रबंधन और प्रधानों के बीच वार्ता के आश्वासन पर प्रदर्शन समाप्त हुआ। इस मामले में कंपनी को बड़ी क्षति का हवाला देते हुए कृष्णशिला के सुरक्षा प्रभारी रजनीश पाठक ने प्रधानों व उनके प्रतिनिधियों खिलाफ तहरीर देकर कार्रवाई की मांग की है।