सोनभद्र। घोरावल तहसीलदार का फर्जी हस्ताक्षर बनाकर एक व्यक्ति का पट्टा बहाल करने किए जाने के आरोप में मंगलवार को डीएम एस. राजलिंगम ने तहसीलदार के पेशकार अखिलेश चंद्र को बर्खास्त कर दिया। सदर तहसील के एसडीएम रहे यमुना धर चौहान की जांच में पेशकार पर प्रथम दृष्टया आरोप सही मिलने पर रिपोर्ट के आधार पर यह कार्रवाई की गई है। जिलाधिकारी के मुताबिक घोरावल तहसील के परसौना गांव में एक व्यक्ति के नाम से जमीन का पट्टा किया गया था। ग्रामीणों ने तहसील में प्रार्थना पत्र देकर आरोप लगाया कि जिस व्यक्ति को पट्टे पर जमीन दी गई है वह गांव का रहने वाला नहीं है। जांच करने पर पट्टाधारक मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले का रहने वाला निकाला। इस नाते 2017 में उसका पट्टा निरस्त कर दिया गया। 2019 में तहसीलदार के आदेश पर उसका पट्टा बहाल कर दिया गया। 2020 में एक व्यक्ति ने एसडीएम को प्रार्थना पत्र देकर अधिकारियों का फर्जी हस्ताक्षर कर पट्टा बहाल किए जाने का आरोप लगाया। एसडीएम ने तहसीलदार से मामले की जांच कराई तो पत्रावली पर तहसीलदार के फर्जी हस्ताक्षर किए जाने की पुष्टि हुई। तहसीलदार की रिपोर्ट के आधार पर एसडीएम ने दो कर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराते हुए डीएम को रिपोर्ट दी। डीएम ने सदर एसडीएम यमुनाधर चौहान को कर्मियों की भूमिका की जांच करने का आदेश दिया। कुछ दिनों पूर्व तत्कालीन एसडीएम यमुनाधर चौहान ने जांच रिपोर्ट डीएम को सौंपी थी। जिलाधिकारी एस. राजलिंगम ने बताया कि तहसीलदार का फर्जी हस्ताक्षर बनाकर जमीन का पट्टा बहाल करने के आरोप में घोरावल तहसील के तहसीलदार के पेशकार अखिलेश चंद्र की सेवा समाप्त कर दी गई है। इस तरह की गड़बड़ी करने वाले अन्य कर्मचारियों के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी।