सोनभद्र। दिव्यांग प्रमाण पत्र बनवा कर शिक्षक पद की नौकरी हथियाने वालों पर कार्रवाई शुरू हो गई है। जिले में तैनात आठ शिक्षक का दिव्यांगता प्रमाण पत्र निरस्त किया जाएगा। इन शिक्षकों पर विभागीय कार्रवाई भी की जाएगी। इसका खुलासा मेडिकल बोर्ड द्वारा की गई जांच में हुआ है। एडीएम योगेंद्र बहादुर सिंह ने दिव्यांगता प्रमाण पत्र निरस्त करने के लिए सीएमओ को पत्र भी भेज दिया गया है।
जिले के परिषदीय प्राथमिक विद्यालय में हुई अनियमित नियुुक्तियों की जांच के संबंध में अपर मुख्य सचिव ने डीएम को निर्देशित किया है। डीएम के निर्देश पर दिव्यांग कोटे के अंतर्गत नियुक्त शिक्षकों के प्रमाण पत्र की जांच के लिए एडीएम की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय टीम गठित की गई। टीम एएसपी ओपी सिंह और बीएसए डॉ. गोरखनाथ पटेल शामिल हैं। एडीएम ने बताया कि सीएमओ द्वारा गठित मेडिकल बोर्ड ने दिव्यांग शिक्षकों का भौतिक सत्यापन करने के बाद 38 शिक्षकों का प्रकरण सर सुंदर लाल चिकित्सालय वाराणसी से कराने की संस्तुति की। सर सुंदर लाल चिकित्सालय मेडिकल बोर्ड को 13 शिक्षकों की रिपोर्ट भेजी गई। इसमें प्रथम दृष्टया पांच शिक्षकों के दिव्यांगता की पुष्टि की गई है। आठ शिक्षकों की दिव्यांगता 40 प्रतिशत से कम होने के कारण दिव्यांगता परीक्षण में अयोग्य घोषित किया गया है। एडीएम ने बताया कि शिक्षक अभिषेक सिंह, संतोष यादव, सुभाष चंद्र मौर्य, स्वर्णलता, प्रदीप कुमार देव पांडेय, राजेश यादव, राम प्रसाद और रुचि राय के दिव्यांगता प्रमाण पत्रों को निरस्त करने के लिए सीएमओ को पत्र प्रेषित किया गया है। इससे दिव्यांगता प्रमाण पत्रों पर नौकरी कर रहे संबंधित शिक्षकों के अलावा अन्य कई शिक्षकों में हड़कंप मच गया है।
जिले के विभिन्न परिषदीय स्कूलों में तैनात आठ शिक्षक का दिव्यांगता प्रमाण पत्र निरस्त करने के लिए सीएमओ को पत्र भेजा गया है। मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट के आधार पर प्रमाण पत्र निरस्त कराने की कार्यवाही कराई जा रही है। - योगेंद्र बहादुर सिंह, अपर जिलाधिकारी, सोनभद्र।