ओबरा। वनाधिकार कानून के तहत जमीन पर मालिकाना अधिकार देने समेत विभिन्न मुद्दों को लेकर आल इंडिया पीपुल्स फ्रंट कार्यकर्ताओं ने बुधवार को तहसील पर प्रदर्शन किया। साथ ही मुख्यमंत्री को सम्बोधित ज्ञापन तहसीलदार सुनील कुमार को सौंपा। वक्ताओं ने कहा कि वनाधिकार दावों की सत्यापन प्रक्रिया में तहसील के आदिवासियों के सभी पांचहजार के करीब दावों का निरीक्षण करा लेने की बात प्रशासन द्वारा बताई जा रही है। जिसमें सिर्फ 200 दावों के करीब सही पाए गए और शेष दावों की छंटनी कर दी गई है। आइपीएफ ने सत्यापन प्रक्रिया पर सवाल खड़ा करते हुए आरोप लगाया कि इसमें नियमों को ताक पर रखा गया है। उन्होंने कहा कि वनाधिकार कानून में कहीं ऐसा नहीं लिखा है कि अगर दावेदारों के पास जोत कोड की जमीन है तो इसके आधार पर उसे कानून का लाभ नहीं मिलेगा। लेकिन यहाँ खतौनी में दर्ज जमीनों के आधार पर आदिवासियों के अधिकांश दावों को पात्र नहीं माना गया। मांग की कि खतौनी समेत ऐसे मानक जो वनाधिकार कानून में नहीं है, के आधार पर छंटनी किए गए दावों का वनाधिकार कानून के तय मानक के अनुसार पुन: परीक्षण कराया जाए और सभी आदिवासियों को पुश्तैनी जोत कोड की जमीनें आवंटित करें और अन्य परम्परागत वन निवासियों के दावों की भी सत्यापन प्रक्रिया शुरू कराईं जाए। साथ ही ओबरा में 100 बेड का सरकारी अस्पताल खोलने, युवाओं को रोजगार देने, मनरेगा में 200 दिन काम, जिले में आदिवासियों समेत सभी वर्ग की लड़कियों के लिए दो आवासीय डिग्री कालेज खोलने, कोल को आदिवासी का दर्जा देने जैसे मुद्दों को हल करने की मांग सरकार से की। इस दौरान दिनकर कपूर, राजेश सचान, कृपा शंकर पनिका, प्रभुनाथ खरवार, मोहन प्रसाद समेत दर्जनों ग्रामीण मौजूद रहे।