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सोनभद्र: गुरमा के जंगल में मिला तेंदुए का शव, शरीर पर जख्मों के निशान

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सोनभद्र जिले के गुरमा रेंज में बलुई बीट के जंगल में मृत मिला तेंदुआ। - फोटो : SONBHADRA
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कैमूर वन्य जीव विहार अंतर्गत गुरमा रेंज के जंगल में सोमवार को तेंदुए का शव मिला है। पेड़ के बीच फंसे तेंदुए के शरीर पर कई जख्म के भी निशान हैं। शव से तेज दुर्गंध के कारण आशंका जताई जा रही है कि उसकी मौत दो-तीन दिन पूर्व हुई होगी। फिलहाल वन विभाग ने शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए वन रेंज कार्यालय में रख दिया है। पिछले एक माह में जिले के तेंदुए के मौत की यह तीसरी घटना है। पांच दिन पूर्व इसी क्षेत्र में एक तेंदुए की मारकुंडी घाटी में ट्रक की चपेट में आने से मौत हो गई थी, जबकि पिछले माह म्योरपुर के जंगल में तेंदुए को शिकारियों ने मार डाला था।
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गुरमा वन रेंज अंतर्गत बलुई बीट के जंगल में गए ग्रामीणों ने सोमवार को एक तेंदुए को मृत हाल में देखा। उन्होंने इसकी सूचना वन विभाग के अधिकारियों को दी। मौके पर पहुंचे वन कर्मियों ने शव की छानबीन की तो देखा उससे शरीर पर कई जगह गहरे जख्म थे। पेड़ के तने में फंसे तेंदुए के शव से दुर्गंध उठ रहा था। उसके पंजों के कुछ नाखून कटे और आसपास खून के भी निशान दिखे। वन कर्मी ग्रामीणों की मदद से शव को कब्जे में लेकर गुरमा रेंज कार्यालय लाए। यहां पशु चिकित्सकों की टीम पोस्टमार्टम करेगी। चुर्क के वन्य जीव प्रतिपालक अरविंद कुमार ने बताया कि तेंदुए की मौत दो-तीन पूर्व होने की आशंका है। शरीर पर जख्म देख प्रतीत हो रहा है कि शिकार के लिए आपस में लड़ने के दौरान यह चोट आई है। शिकारियों ने मारा होता तो शव या उसके कीमती अंग भी साथ ले गए होते। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से मौत का सही कारण स्पष्ट होगा। उन्होंने कैमूर के जंगलों में अभी भी बड़ी संख्या में तेंदुआ होने की बात कही।
एक माह में तीन तेंदुओं की गई जान
करीब ढाई हजार वर्ग हेक्टेयर में फैले जिले के जंगलों में वन्य जीवों की बड़ी संख्या रही है। यहां तेंदुआ, बाघ, भालू, लकड़ बग्घा, लोमड़ी, हिरन सहित अन्य वन्य जीव दिखते रहे हैं, लेकिन संरक्षण के अभाव में इनकी संख्या निरंतर कम होती गई। एक माह में तेंदुए के मौत की तीसरी घटना ने वन्य जीवों की सुरक्षा को लेकर जंगलों में महकमे की सक्रियता पर सवाल खड़ा कर दिया है। पहली घटना गत 28 जनवरी की है। म्योरपुर के जंगल में एक तेंदुए का शव मिला था। पोस्टमार्टम में इसकी हत्या की बात सामने आई थी। इस मामले में कुछ लोगों को गिरफ्तार कर पुलिस ने जेल भी भेजा। इसके बाद 15 फरवरी की रात वाराणसी-शक्तिनगर मार्ग पर मारकुंडी घाटी में सड़क पार करने के दौरान तेंदुआ ट्रक की चपेट में आ गया था। अब गुरमा के जंगल में तीसरे तेंदुए की मौत से वन विभाग सकते में है। लगातार हो रही मौतों से वन्य जीवों पर खतरा मंडराने लगा है।
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नदियों में खनन तो कारण नहीं
वन्य जीवों की सुरक्षा के मद्देनजर ही सोन नदी के किनारे के क्षेत्र को संरक्षित एरिया घोषित किया गया है। इस क्षेत्र में किसी तरह के खनन कार्य की अनुमति नहीं है, ताकि वन्य जीव उन्मुक्त भाव से नदी किनारे विचरण कर सकें। उन्हें पानी की दिक्कत न हो। नियमों को दरकिनार कर कुछ खनन कारोबारी सोन नदी में भारी मशीन उतारकर खनन कर रहे हैं। दिन-रात धड़ल्ले से चल रहे खनन कार्य से वन्य जीवों के प्राकृतिक वास में खलल पड़ रही है। लिहाजा वह दूसरे क्षेत्र में भटक रहे हैं।
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