हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद जिला पंचायत वसूली का ठेका तो बदल गया लेकिन ऊर्जांचल में नियमों को ताक पर रखकर की जा रही वसूली के ढर्रे में कोई बदलाव नहीं आ पाया है। नियमों को ताक पर रखकर वाराणसी-शक्तिनगर राजमार्ग और रीवा-रांची राष्ट्रीय राजमार्ग पर वसूली की जा रही है। हाईवे पर बीना में जहां दिनदहाड़े डंडामार वसूली हो रही है। वहीं रीवा-रांची मार्ग पर दुल्लापाथर में शाम छह से सुबह छह बजे तक वसूली का खेल धड़ल्ले से हो रहा है।
अनपरा-शक्तिनगर मार्ग को वाराणसी-शक्तिनगर मार्ग का ही एक भाग माना जाता है लेकिन जिस जमीन पर इसका निर्माण हुआ है वह कोयला कनवर्जन अधिनियम के तहत अधिग्रहित जमीन है, जो एनसीएल के खाते में आती है। इसी तरह औड़ी मोड़ से लेकर शक्तिनगर तक कहीं भी लिंक मार्ग नहीं है। या तो हाईवे है या फिर कोल परियोजनाओं की जमीन। नियमानुसार परियोजनाओं की जमीन या हाईवेे पर वसूली नहीं हो सकती है।
लेकिन पिछले एक साल से अधिक समय से हाईवे पर नियमों को धता जता कर कभी डंडे के बल पर तो कभी असलहों का धौंस दिखाकर वसूली की जा रही है। हाईकोर्ट के दखल के बाद ठेका तो बदल गया लेकिन वसूली का पुराना ढर्रा बना हुआ है। इसे लेकर आज भ्ाी कोई बदलाव नहीं हुआ। डंडे के बल पर ठेेकेदारों की वसूली बेरोकटोक जारी है। ऐसे में धीरे-धीरे लोगांें में इसे लेकर आक्रोश्ा बढ़ता जा रहा है।ऊर्जांचल ट्रक आपरेटर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष एपी मिश्र, भाजपा के मिथिलेश आदि का कहना है कि इसको लेकर संबंधितों से कई बार गुहार लगाई गई लेकिन इस पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
उधर, अपर मुख्य अधिकारी जिला पंचायत आलोक सिंह का कहना था कि हाईवे पर वसूली के लिए कोई इजाजत नहीं दी गई है। नियमानुसार लिंक मार्ग पर वसूली करनी है। नियमों का उल्लंघन न करने की कड़ी हिदायत भी दी गई है, बावजूद हाईवे पर वसूली की जा रही है तो इसको लेकर कड़ी कार्रवाई होगी। जरूरत पड़ने पर हाईकोर्ट को भी स्थिति से अवगत कराया जाएगा।