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मालगाड़ी के पुर्जा चोर गिरफ्त में

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रेवाड़ी जंक्शन पर पटरी से उतरी मालगाड़ी - फोटो : अमर उजाला
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आरपीएफ ने रविवार की रात मालगाड़ियों के पुर्जे चुराने वाले गिरोह का भंडाफोड़ किया। रेलवे पुलिस ने गिरोह के सरगना समेत सातों सदस्यों को ऊर्जांचल परिक्षेत्र से पकड़ा। वे कोयला लोडिंग के समय मालगाड़ी वैगनों से उपकरणों की चोरी करते थे। उनको इलाहाबाद आरपीएफ के स्पेशल कोर्ट भेज दिया गया। वहां से उनको न्यायिक हिरासत में नैनी जेल भेज दिया गया।
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 आरपीएफ को शिकायत मिल रही थी कि एनसीएल की कृष्णशिला (बीना) और दुधीचुआ लोडिंग प्वाइंट पर कोयला लोड करने जाने वाली मालगाड़ी से पिन, सस्पेंशन हुक आदि उपकरण चोरी हो रहे थे। इसकी भरपाई एनसीएल को करनी पड़ती थी। उपकरण चोरी होने से मालगाड़ियां खड़ी हो जाती थीं। इससे रेलवे को भी हर माह लाखों का नुकसान उठाना पड़ता था।

आरपीएफ ने छानबीन शुरू की तो पता चला कि चोरी हो रहे उपकरणों को बैढ़न-निगाही रोड स्थित मिनी फैक्ट्री में खपाया जा रहा है। इस पर रविवार की रात पुलिस ने फैक्ट्री में दबिश देकर गिरोह के सरगना संतोष कुमार विश्वकर्मा और उसकी निशानदेही पर अजय कुमार यादव, बबलू, छोटू कुमार, लाला कुमार रावत, बिजय उपाध्याय, नंदलाल गोस्वामी निवासी निगाही, थाना बैढ़न को गिरफ्तार कर लिया। उनके पास से तीन कंट्रोल राड, दस टाई राड, 18 पिन, 25 सस्पेंशन हुक बरामद किए गए।
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 एसओ एएस खान ने बताया कि मालगाड़ी वैगनों से नकल पिन, कंट्रोल रॉड आदि सामानों की चोरी करने वाले महज 20 रुपये में 12 सौ रुपये का सामान बेच देते थे। इसकी खरीद मिनी फैक्ट्री संचालक संतोष करता था। चोरों से सामान संतोष तक पहुंचाने के एवज में विजय प्रति नग पांच से दस रुपये कमीशन लेता था। संतोष चोरी के उपकरणों को हल का फाल, छेनी, सब्बल, मूसली आदि की शक्ल देकर बेच देता था। कम दाम में, अच्छे लोहे का सामान हाथों हाथ बिक जाता था।


चोर कई बार सभी 52 वैगनों की नकल पिन, कंट्रोल रोड आदि खोल जाते थे, इसके चलते एनसीएल और रेलवे को एक ही रैक में लाखों का नुकसान सहना पड़ जाता था। बता दें कि एनसीएल एक रैक को लोडिंग से लेकर संबंधित परियोजना तक पहुंचाने के लिए 15 दिन तक किराया या तीन हजार किमी तक संचालन के किराए पर लेता है।


इसके बदले में वह लाखों रुपये किराया रेलवे को अदा करता है। चोरों की वजह से इसमें देर होती है तो रेलवे को उपकरण कीमत और किराया दोनों की मार सहनी पड़ती है। महज एक रैक से रेलवे को रोजाना लगभग 15 लाख की चपत लगती है।
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