सोनभद्र। कुड़ारी में पिछले छह माह से अवैध रूप से बालू का खनन हो रहा था। जिम्मेदारों की शिकायतों को अगर प्रशासनिक अमले ने गंभीरता दिखाई होती तो शायद मंगलवार की घटना नहीं होती ..। डीएफओ से लेकर जिले के बड़े अफसरों तक एक के बाद एक शिकायतें पहुंचती रही लेकिन जांच के नाम पर जिम्मेदार शिकायतकर्ताओं की ही भूमिका को कटघरे में खड़ा कर देते थे। यही नहीं यूपी और मध्यप्रदेश के सीमा से होने का हवाला देते हुए जिम्मेदार अवैध खनन पर परदा डालने का खेल खेलते रहे। जबकि बालू लदे ट्रक यूपी के जुगैल थाना और चोपन थाना, टोल प्लाजा, खनन बैरियर से होते हुए पूर्वांचल के कई जिलों से गुजरते थे। ग्रामीण बताते हैं कि कुड़वा नाले के पास और शिल्पी-कुड़ारी के बीच चल रहे पुल निर्माण के नजदीक अवैध बालू खनन लंबे समय से चल रहा था। पिछले छह माह से तो यहां इस तरह बालू खनन किया गया जैसे जिम्मेदारों की तरफ से ही अवैध खनन की खुली छूट दे दी गई हो। आते-जाते धड़ल्ले से होते अवैध खनन को देख कई लोगों ने इसकी जानकारी डीएफओ, से लेकर बड़े अफसरों तक पहुंचाई। यूपी और मध्यप्रदेश की सीमा पर बालू का खनन कर रोजाना पचास से अधिक ट्रैक्टर और ट्राली से बालू यूपी किनारे स्टोर करते थे। फिर ट्रकों का लोडकर बालू यूपी के जुगैल थाना, चोपन थाना और टोल प्लाजा से होते हुए पूर्वांचल के जिले में भेजा था।