सोनभद्र। घोरावल कोतवाली क्षेत्र का दुरूह इलाका कोलिया घाटी, यूपी-एमपी के बार्डर पर मध्य प्रदेश का सीमावर्ती इलाका बिसही घाटी और झरकटा घाटी क्षेत्र बालू के अवैध खनन और परिवहन में खनन माफियाओं के लिए मुफीद साबित हो रहा है। प्रशासन की सख्ती के बाद भी खनन माफियाओं में कोई भय नहीं है।
गुरुवल मार्ग पर पड़ने वाले कोलिया घाटी में सोन नदी से बारहों महीने बालू का अवैध खनन और परिवहन होता है। प्रशासन की सख्ती पर कभी कभार खनन बंद होता है, लेकिन कुछ दिनों बाद पुन: शुरू हो जाता है। वहीं बरदिया-शिवद्वार मार्ग पर मध्य प्रदेश की सीमा में पड़ने वाला झरकटा घाटी व बिसही घाटी प्रमुख खनन क्षेत्र है, जो खनन माफियाओं के लिए सर्वाधिक मुफीद बताया जाता है। यहां से बालू खनन कर घोरावल नगर के व्यवसायियों को और उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती इलाकों में ऊंचे दामों पर बेचा जाता है और इसके लिए फर्जी परमिट व फर्जी कागजातों का इस्तेमाल किया जाता है। प्रशासन हमेशा दावा करता है कि इस एरिया में अवैध खनन नहीं हो रहा है। इसके विपरीत सूत्रों की माने तो संबंधित सरकारी विभागों की मिली भगत से इस क्षेत्र में सोन नदी से खूब जमकर अवैध बालू खनन का व्यापार चल रहा है जबकि खनन के दृष्टिकोण से यह प्रतिबंधित क्षेत्र है। बताया जाता है कि देर रात से भोर होने तक कई ट्रैक्टर व टीपर पूरी रात बालू ढोते हैं। काली रात में होने वाले इस काले धंधे में कई सफेदपोश शामिल बताए जाते हैं। इन खनन माफियाओं का नेटवर्क इतना तगड़ा है कि यदि रात में कोई साइकल या गाड़ी भी खनन क्षेत्र की तरफ जाए तो कई किमी पहले ही इनको पता चल जाता है और ये सतर्क हो जाते हैं। तत्कालीन एसडीएम राजकुमार और एसडीएम मनिकंडन ए. के कार्यकाल में काफी सख्ती बरती गई थी, जिससे खनन पर प्रभावी लगाम लगा था। दोनों अधिकारियों ने सैकड़ों ट्रैक्टर बालू का अवैध भंडारण भी पकड़ा था, जिससे खनन माफिया भयभीत रहे। लेकिन इधर बीच एक बार फिर खनन का अवैध व्यापार जोरों पर है।