ऐसे तैयार किया था रिश्तेदारी का नेटवर्क
इंस्पेक्टर सदानंद राय की अगुवाई वाली एसआईटी की जांच में सामने आया है कि रवि ने सोनभद्र में ममेरे भाइयों के नाम फर्जी फर्म खुलवाकर उनके नाम पर भदोही में ही बैठकर सिरप आपूर्ति का ब्योरा तैयार किया और इसके आधार पर संबंधित बैच वाली सिरप की खेप रांची से सोनभद्र के बजाय सीधे पश्चिम बंगाल और वहां से बांग्लादेश भेज दी गई। इस पर किसी की नजर न पड़े, इसके लिए सोनभद्र में कागज पर दिखाई गई आपूर्ति का कागज पर ही परिवहन दिखाते हुए भदोही पहुंचा दिया।
इसके लिए भदोही में अपने ही कुनबे के व्यक्ति के नाम हासिल किए गए दवा फर्म के लाइसेंस का इस्तेमाल किया गया। इस कागजी आपूर्ति को रिकॉर्ड में दुरुस्त दिखाने के लिए शुभम के मौसेरे भाई गौरव जायसवाल के खाते के इस्तेमाल किया गया। पुलिस का दावा है कि गौरव के खाते से 10 लाख का एक ऐसा लेन-देन मिला है, जिसका इस्तेमाल सोनभद्र में फर्जी आपूर्ति को कागज पर दुरुस्त दिखाने के लिए किया गया।
जारी किया जा चुका है लुक आउट नोटिस
शुभम की तरह रवि भी विदेश न भाग जाए इसके लिए सोनभद्र पुलिस ने लुक आउट नोटिस जारी किया है। वहीं उसके भदोही के चांदनी चौक, नईबाजार स्थित आवास पर जाकर कुर्की की भी कार्रवाई की जा चुकी है। एसपी अभिषेक वर्मा ने उसकी गिरफ्तारी के लिए 25 हजार का इनाम भी घोषित कर रखा है। एसपी का कहना है कि रवि की तलाश की जा रही है।
न्यायालय ने खारिज की अग्रिम जमानत अर्जी
रवि ने न्यायालय से अग्रिम जमानत अर्जी दाखिल की थी। विशेष न्यायाधीश एनडीपीएस एक्ट ने बृहस्पतिवार को अर्जी पर सुनवाई की। बचाव पक्ष ने दलील दी कि सत्यम और विजय उसके ममेरे भाई जरूर हैं, लेकिन रुपये के विवाद में उनके बीच दुश्मनी हो गई है। इसी का फायदा उठाते हुए पुलिस ने उनकी साजिश में आकर उसे आरोपी बना दिया है। वहीं अभियोजन पक्ष का दावा था कि आरोपी दवा के पेशे से जुड़ा है। शुभम का करीबी है। उसी की साजिश और आपराधिक नेटवर्क में शामिल होकर उसने अपने ममेरे भाइयों के नाम सोनभद्र में फर्म खोलवाई। नामजद आरोपियों से पूछताछ और जांच में भी उसके खिलाफ आरोप पाए गए हैं। न्यायालय ने पाया कि जो साक्ष्य उनके सामने रखे गए हैं, उससे प्रथम दृष्टया मामले में उसकी संलिप्तता प्रतीत हो रही है। विवेचना जारी है। फिलहाल कोई राहत नहीं दी जा सकती।