फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Sonebhadra News: ऊर्जांचल में खांसी के मरीज वाराणसी से दोगुने, फिर भी हवा की शुद्धता के इंतजाम कागजों पर

विज्ञापन
औड़ी-श​क्तिनगर फोरलेन पर उड़ती धूल। संवाद
विज्ञापन
अनपरा। ऊर्जांचल में तापीय परियोजनाओं से निकलने वाली राख और कोयले के सड़क परिवहन से वायु प्रदूषण की समस्या गंभीर बनी हुई है। एम्स भोपाल की स्वास्थ्य संबंधी रिपोर्ट में भी तापीय परियोजनाओं के आसपास रहने वाली आबादी के वायु गुणवत्ता की खराब श्रेणियों के संपर्क में रहने की बात सामने आई है। रिपोर्ट में क्षेत्र के बच्चों और वयस्कों में सूखी खांसी के मामले वाराणसी की तुलना में काफी अधिक पाए गए हैं। इसके बावजूद प्रदूषण नियंत्रण के लिए किए जा रहे उपायों पर सवाल उठ रहे हैं। तापीय परियोजनाओं में प्रतिदिन भारी मात्रा में कोयला जलाया जाता है। इससे निकलने वाली फ्लाई ऐश और ऐश बांधों से राख का परिवहन सड़क मार्ग से होता है। कोयले के परिवहन के दौरान भी सड़क पर कोयला और धूल गिरती रहती है। वाहनों के आवागमन से यह धूल हवा में उड़ती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि औड़ी मोड़ से शक्तिनगर तक कई स्थानों पर हाईवे पर धूल की मोटी परत जमा रहती है। वाहनों के गुजरने पर धूल का गुबार उठता है, जिससे दृश्यता प्रभावित होने के साथ लोगों को सांस लेने में परेशानी होती है। एम्स भोपाल की ओर से फरवरी 2025 से फरवरी 2026 के बीच तापीय परियोजनाओं के आसपास रहने वाले 513 और वाराणसी के 584 लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। पिछले महीने आई रिपोर्ट के अनुसार तापीय परियोजनाओं के आसपास रहने वाले 71 फीसदी बच्चों और 75 प्रतिशत वयस्कों में सूखी खांसी के लक्षण मिले। इसके मुकाबले वाराणसी के बच्चों में यह आंकड़ा 37.8 प्रतिशत और वयस्कों में 45 प्रतिशत रहा। रिपोर्ट में आंखों में जलन और खुजली समेत अन्य स्वास्थ्य संबंधी शिकायतों का भी उल्लेख किया गया है। करीब सात वर्ष पूर्व प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से कराई गई जांच में अनपरा से शक्तिनगर के बीच करीब 18 किलोमीटर सड़क पर धूल के कणों की समस्या सामने आई थी। जांच में कुछ स्थानों पर 75 माइक्रोग्राम से छोटे कण भी निर्धारित स्तर से अधिक पाए गए थे। इसके बाद प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने पीडब्ल्यूडी को नोटिस जारी कर परियोजनाओं के आसपास की सड़कों पर पानी का छिड़काव कराने के निर्देश दिए थे। स्थानीय लोगों का कहना है कि अब पानी का छिड़काव नियमित नहीं होता। करीब दो वर्ष पूर्व एनटीपीसी शक्तिनगर के गेस्ट हाउस में पुलिस-प्रशासन की मौजूदगी में परियोजना के अधिकारियों और संबंधित विभागों की बैठक हुई थी। इसमें हाईवे की नियमित सफाई समेत प्रदूषण नियंत्रण के लिए आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए गए थे। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इसके बावजूद सड़क पर धूल की मोटी परत जमा रहती है और सफाई नियमित रूप से नहीं होती। दो वर्ष पूर्व एनटीपीसी शक्तिनगर के गेस्ट हाउस में डीएम और एसपी ने परियोजनाओं के अधिकारियों और संबंधित विभागों के साथ बैठक कर हाईवे की नियमित सफाई के कड़े निर्देश दिए थे लेकिन निर्देश के बाद सफाई के नाम पर सिर्फ कोरम पूरा किया जाता है। आज भी हाईवे पर धूल की मोटी परत जमी हुई है। जो आवागमन के दौरान धूल का गुबार बनकर उड़ती है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें