दो तरह का होता है आजीवन कारावास
विशेष लोक अभियोजक दिनेश अग्रहरि ने बताया कि आजीवन कारावास दो तरह का होता है। एक उम्रकैद ऐसी होती है जिसमें बाद में दोषी के अच्छे आचरण, उसके बुजुर्ग होने के बाद उसकी शारीरिक स्थिति को देखते हुए सरकार के स्तर पर सजा कम करने का निर्णय लिया जा सकता है लेकिन शेष प्राकृत जीवन काल तक के लिए सुनाए जाने वाले आजीवन कारावास में दोषी के आखिरी सांस तक सजा बरकरार रहती है। बताया कि मासूम बेटियों के साथ जिस तरह की हरकत की गई थी। वह जिले में पहला प्रकरण था। न्यायालय ने भी इस मामले में काफी संजीदगी बरती। गवाहों ने भी अभियोजन कथानक का पूरा समर्थन किया, जिसके चलते दोषी को बड़ी सजा दिलवाने में कामयाबी मिली।