सोनभद्र। पिपरी थानाक्षेत्र में नाबालिग को शादी का झांसा देकर जबलपुर ले जाने और यौन शोषण करने के मामले में दोषी रूपेश भुइयां को 10 वर्ष कठोर कैद की सजा सुनाई गई है। पीड़िता को मध्यप्रदेश की चाइल्ड हेल्पलाइन ने जबलपुर रेलवे स्टेशन पर भटकते हाल में पाया था। विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट ओंकार शुक्ल की अदालत ने मंगलवार को सुनवाई के दौरान दोषी को 35 हजार अर्थदंड की सजा भी सुनाई। इसकी अदायगी न करने पर 10 माह अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। पिपरी थाना क्षेत्र के रहने वाले एक व्यक्ति ने 20 जुलाई 2019 को थाने पर तहरीर दी थी कि उसकी नाबालिग बेटी 15 जुलाई से लापता है। पता चला है कि उसे रेलवे क्रॉसिंग हाइटेक रेणुकूट के पास रहने वाला रूपेश भुइया बहला-फुसला कर ले गया है। 23 जुलाई 2019 को सूचना मिली कि पीड़िता को आरपीएफ/रेलवे चाइल्ड हेल्पलाइन जबलपुर की टीम ने पीड़िता को रेलवे स्टेशन पर घूमते हाल में पाया है और उसे बाल कल्याण समिति जबलपुर में रखा गया है। वहां से लाकर पीड़िता का बयान और चिकित्सकीय परीक्षण कराया गया। दुष्कर्म की पुष्टि होने पर संबंधित धारा और पॉक्सो एक्ट की बढ़ोतरी की गई। दाखिल चार्जशीट पर 19 नवंबर 2019 को आरोप तय करते हुए न्यायालय ने सुनवाई शुरू की। कुल सात गवाह परीक्षित कराए गए। सोमवार को दोष सिद्धि के बाद मंगलवार को सजा के बिंदु पर सुनवाई की गई। बचाव पक्ष की दलील थी कि यह पहला अपराध और पूर्व में काफी समय तक जिला कारागार में निरुद्ध रहा है। वह ग्रामीण परिवेश से है। उसे कम से कम दंड दिया जाए। विशेष लोक अभियोजक ने इस पर आपत्ति जताई। कहा कि दोषी यह यह जानते हुए कि वह नाबालिग है, उसे बहला-फुसलाकर ले गया और उसका यौन शोषण किया। उसके इस कृत्य से पीड़िता की निजता भंग हुई है और उसके परिवार की भी मर्यादा धूमिल हुई है। इसलिए अधिक से अधिक दंड दिया जाए। न्यायालय ने माना कि इस तरह का अपराध न केवल पीड़िता के जीवन पर धब्बा लगाता है, बल्कि संपूर्ण सामाजिक तंत्र को प्रभावित करता है। दोनों पक्षों के तर्क और पत्रावली के अवलोकन से स्पष्ट है कि दोषी यह जानते हुए भी कि पीड़िता नाबालिग थी। उसके साथ गंभीर अपराध किया। इसलिए उसे दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट के तहत 10 साल के सश्रम कारावास और 25 हजार अर्थदंड से दंडित किया गया।