सीएमओ कार्यालय में एक विवादित बाबू को महत्वपूर्ण पटलों का चार्ज देना चर्चा में है। वाराणसी में तैनाती के दौरान शासकीय धन के दुरुपयोग के आरोप में उसके विरुद्ध निलंबन की कार्रवाई भी हो चुकी है। बावजूद यहां कई महत्वपूर्ण पटलों का जिम्मा सौंपने पर लोग अफसरों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं। वर्ष 2016 में एसीएमओ वाराणसी के कार्यालय में तैनात वरिष्ठ सहायक को शासकीय क्षति पहुंचाने आरोप में निलंबित कर दिया गया था। प्रकरण की जांच अपर निदेशक चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण इलाहाबाद मंडल को सौंपी गई थी। बाद में तत्कालीन निदेशक प्रशासन अरविंद कुमार सिंह ने आरोपी लिपिक का निलंबन तो निरस्त कर दिया लेकिन सीबीआई से मूल अभिलेख प्राप्त होने और दोषमुक्त पाए जाने तक उससे एनआरएचएम या एनएचएम योजनांतर्गत संचालित योजनाओं से संबंधित कोई भी कार्य न लेने का निर्देश दिया था। अब वाराणसी से सोनभद्र तबादले के बाद वरिष्ठ सहायक को राज्य स्तरीय बजट की देखरेख समेत कई महत्वपूर्ण पटल का जिम्मा दिया है। दफ्तर में तैनात कई लिपिकों का भी चार्ज हटाकर उसे सौंपा है। इसमें स्थापना, गोपनीय प्रविष्टि, वेतन, ई-टेंडरिंग आदि कार्य भी शामिल हैं। इस बाबत सीएमओ डॉ. नेम सिंह का कहना है कि सीएमओ कार्यालय मेें वरिष्ठ सहायक का पद रिक्त था। समकक्ष होने के कारण यह जिम्मा दिया है। एनआरएचएम या एनएचएम का पटल नहीं दिया है।