ऊर्जांचल में लगातार बारिश ने जनजीवन की रफ्तार थामने के साथ ही परियोजनाओं में भी अफरातफरी की स्थिति पैदा कर दी है। स्थिति यह है कि बीना, खडिय़ा सहित अन्य कोल परियोजनाओं के खदानों में पानी भरने से मशीनें डूब गई हैँ। वहीं कोयला उत्पादन के साथ ही कोयले का प्रेषण भी खासा प्रभावित हुआ।
जयंत से होकर गुजरा बैढन-सिंगरौली मार्ग दो जगहों से कटकर बह गया है। इससे इस इस रोड पर आवाजाही ठप हो गई है। माह भर पूर्व भी यह सड़क कटकर बह गई थी, जिससे दस दिन तक आवागमन ठप रहा था।
बुधवार को तेज बारिश से बीना परियोजना के खदान में भरे पानी से एक शावेल मशीन करीब-करीब पूरी तरह से डूब गई। खड़िया, कृष्णशिला, ककरी, निगाही, जयंत, अमलोरी, दुधीचुआ, गोरबी बी में भी अफरातफरी की स्थिति बनी रही। जयंत में सड़क कटकर बह जाने से, इस रोड से बैढ़न-सिंगरौली के बीच की आवाजाही थम गई।
टूटी सड़क से किसी भी हाल में आवागमन न होने पाए, इसके लिए क्षतिग्रस्त जगहों के दोनों तरफ ड्रम रखने के साथ ही, पुलिसकर्मियों को भी तैनात कर दिया गया है। इसके चलते इस रास्ते आवागमन करने वालों तथा परियोजना में ड्यूटी करने वालों को बैढ़न से बरगवां होकर कई किमी ज्यादा दूरी तय करते हुए गंतव्य तक पहुंचना पड़ा।
बारिश का सबसे ज्यादा असर कोयला उत्पादन पर देखने को मिला। 24 सितंबर को जो कोयला उत्पादन 1.74 लाख टन, 25 सितंबर को 1.47 लाख टन था। वह मंगलवार को घटकर 95 हजार टन और बुधवार को इससे भी घटकर 93.5 हजार टन पहुंच गया। जबकि एनसीएल का औसत उत्पादन 1.92 लाख टन रोजाना के आस-पास है।
इसी तरह 24 सितंबर को कोयले की लोडिंग 2.05 लाख टन थी। वह बुधवार को घटकर 1.27 लाख पर आ गई। इससे जहां परियोजनाओं की कोयला आपूर्ति प्रभावित हुई। वहीं उत्पादन लक्ष्य को लेकर एनसीएल प्रबंधन में भी बेचैनी की स्थिति बनी रही।