क्षेत्रीय पुरातत्व इकाई वाराणसी की ओर से बुधवार को विश्व धरोहर सप्ताह के अंतर्गत राजा बलदेव दास बिड़ला सोनघाटी इंटर कॉलेज पटवध में तीन दिवसीय समारोह की शुरुआत हुई।
पहले दिन व्याख्यानमाला में सोनभद्र के सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण, संवर्धन, पर्यटन विकास विषय पर चर्चा हुई। चित्र प्रदर्शनी के माध्यम से छात्र-छात्राओं को यहां की धरोहरों के बारे में जानकारी दी गई।
बतौर मुख्य अतिथि इतिहासकार दीपक कुमार केसरवानी ने कहा कि धरोहरों का संरक्षण हमारा दायित्व है। पौराणिक शोण महानद के किनारे स्थित सोनभद्र में 160 करोड़ वर्ष पुराना सलखन फॉसिल्स पार्क यहां समुद्र के अस्तित्व को प्रमाणित करता है।
यहां के जंगलों में स्थित गुफाओं, कंदराओं, पहाड़ों में आदिम मानव की ओर से चित्रांकित गुफाचित्र मानव के सामाजिक, सांस्कृतिक, धार्मिक, आर्थिक विकास की कहानी चलचित्र की तरह बयां करते हैं। सोनभद्र की यही विशेषता इसे विश्व स्तरीय श्रेणी प्रदान करती है।
अध्यक्षता कर रहे सर्वेंट्स आफ इंडिया सोसाइटी के मंत्री आत्मानंद मिश्र ने कहा कि इस जनपद की आदिकाल से आधुनिक काल तक की आदिकालीन, पौराणिक, धार्मिक, ऐतिहासिक महत्व कायम रही है।
मुख्य वक्ता कठपुतली कला विशेषज्ञ, राष्ट्रपति शिक्षक पुरस्कार से पुरस्कृत रंगकर्मी हरिशंकर शुक्ल ने कहा कि खनिज पदार्थों, प्राकृतिक संपदाओं की अनुभूति हमें इस क्षेत्र के पर्यटन से होता है।
कार्यक्रम में गुप्तकाशी सेवा ट्रस्ट के संस्थापक रवि प्रकाश चौबे, दिल्ली दूरदर्शन केंद्र के इशहाक खान, आकाशवाणी केंद्र ओबरा के हेमंत मोहन ने भी विचार रखे।
क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी डॉ. रामनरेश पाल ने अतिथियों का स्वागत, कॉलेज के प्रधानाचार्य आरडी सिंह ने धन्यवाद ज्ञापन और उदय प्रताप धर दुबे ने संचालन किया। इस मौके पर अभिषेक सिंह, रवि कुमार, दिनेश गुप्ता, हर्षवर्धन, उमेश कुमार, रविंद्र नाथ मौर्या, बृजेश चतुर्वेदी आदि मौजूद रहे।