आजादी के 69 साल बाद भी देश की पारेषण लाइनों का संचालन जापानी कंडक्टरों पर निर्भर है। सोमवार को दिल्ली में नार्दन रीजनल पावर कमेटी (एनआरपीसी) की बैठक में यह मसला खासा छाया रहा। छह दिन पूर्व अनपरा सी-उन्नाव सहित अन्य पारेषण लाइनों की ट्रिपिंग से पूरे उत्तर भारत में गहराए बिजली संकट को देखते हुए, भारत में ही पर्याप्त संख्या में कंडक्टर निर्माण की जरूरत जताई गई।
मसले को लेकर अविलंब जरूरी पहल का भी निर्णय लिया गया। जापानी कंडक्टर उपलब्ध न हाने से परेशानी होती है।तीस नवंबर से लेकर दो दिसंबर तक लगातार तीन दिन पारेषण लाइनों की ट्रिपिंग, खासकर 765केवीए की अनपरा सी-उन्नाव लाइन के ट्रिप करने को लेकर चिंता जताई गई। कोहरे को देखते हुए पेट्रोलिंग तेज करने के साथ ही, जहां ज्यादा दिक्कत आ रही है, वहां हर पल नजर रखने का निर्देश दिए गए।
इस दौरान अभियंताओं प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से पहुंचे अभियंताओं ने जानकारी दी कि जंगल, पेड़-पौधों की बहुलता वाले इलाके में पक्षी तार पर और कंडक्टर पर बीट कर दे रहे हैं। कोहरे के चलते इससे तार पर नमी बढ़ जा रहा है, जिसका सीधा असर विद्युत प्रवाह पर पड़ रहा है। जिससे ट्रिपिंग का खतरा बढ़ गया है।किस इलाके में कौन से पक्षी हैं और उनका बीट किस तरह असर डाल रहा है, इस पर अनुसंधान का निर्णय लिया गया।
साथ ही ऐसे जगहों पर लगातार बीट की सफाई करवाते रहने की ताकीद की गई। बता दें कि गत 30 दिसंबर को 765केवीए की अनपरा सी-उन्नाव, 220केवीए की अनपरा-ओबरा, अनपरा-मऊ, अनपरा-सारनाथ लाइन ट्रिप कर गई थी, जिससे नौ घंटे के लिए अनपरा में बिजली उत्पादन पूरी तरह शून्य हो गया, वहीं हालात संभलने में तीन दिन लगे थे।