सोनभद्र। राख बांधों के अत्यधिक भराव के चलते बांध की दीवारों के दरकने की बढ़ती घटनाओं को एनजीटी ने गंभीरता से लिया है। तीन दिन पूर्व सोनभद्र-सिंगरौली की स्थिति को लेकर हुई एनजीटी के ओवरसाइट कमेटी की बैठक में इस मसले पर प्रमुखता से चर्चा की गई। बांधों के रख-रखाव और पर्यावरण को होने वाली नुकसान की निगरानी संयुक्त कमेटी से कराने के निर्णय के साथ ही राख बांधों की दीवारों को मिट्टी की बजाय कंक्रीट से बनाने के निर्देश दिए गए। ओवरसाइट कमेटी की बैठक में जिन मसलों पर चर्चा हुई, उसकी कार्यवृत्ति भी जारी की गई है। जिसमें बताया गया है कि बिजली परियोजनाओं से निकलने वाले कोयले की राख के समुचित निस्तारण के निर्देश के क्रम मेंबीते 23 जुलाई को सोनभद्र और सिंगरौली स्थित बिजली परियोजनाओं के प्रतिनिधियों और केंद्रीय तथा उत्तरप्रदेश-मध्यप्रदेश राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों के साथ बैठक हुई। बैठक में बिजलीघरों से निकलने वाले राख के सुरक्षित निस्तारण को लेकर गहन विचार-विमर्श किया गया। कुछ परियोजनाओं ने 56 प्रतिशत तो कुछ ने 38 प्रतिशत राख का निस्तारण ऐशडैम के अलावा करने की जानकारी दी। बेलवादह ऐशडैम सहित अन्य के हालात पर चिंता जताते हुए कहा गया कि राख बांधों के रख-रखाव पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। परियोजनाओं को राख बांध की दीवार कंक्रीट (आरसीसी) से करवाने के निर्देश दिए गए। वहीं केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की संयुक्त टीम को ऐशडैमों और रिहंद बांध में राख भराव की स्थिति की निगरानी के निर्देश भी दिए गए। राख भराव के आधार पर संबंधित परियोजनाओं से पर्यावरण को होने वाली क्षतिपूर्ति के बाबत वसूली का मसौदा तय करने के निर्देश भी दिए गए। कहा गया कि राख बांध की ऊंचाई बढ़ाने और बांध में भरी जाने वाली राख किसी भी हाल में ओवरफ्लो न होने पाए। इसके लिए प्लान बनाने की हिदायत दी गई। खदानों में भरी जाने वाली राख से भूजल अत्यधिक प्रदूषित न होने पाए, इसका भी ध्यान रखने का निर्देश दिया। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी राधेश्याम ने बताया कि ओवरसाइट कमेटी की बैठक में राख बांधों की दीवारों का आरसीसी निर्माण के निर्देश दिए गए हैं। इसका शीघ्र पालन हो, इसके लिए उन्होंने जरूरी कवायद भी शुरू कर दी है।