वर्ष 2015 में आपदाग्रस्त घोषित सोनभद्र जिले के अधिकतर किसानों के हिस्से में मुआवजा के नाम पर सिर्फ मायूसी हाथ लगी है। जिम्मेदारों की लापरवाही कहें या तालमेल का अभाव। अतिवृष्टि और ओलावृष्टि से प्रभावित किसानों को बांटने के लिए आए 50 लाख में से 441 किसानों में महज 26 लाख ही बांटे जा सके।
ऐसे में 23 लाख रुपये सरेंडर हो गया। अभी भी पीड़ित किसान मुआवजा की आस में अधिकारियों के वहां चक्कर काटते रहते हैं। वहीं अधिकारी कहते हैं उनके वहां प्रभावित एक एक किसान को मुआवजा मिला है। बाकी जो बजट बचा था उसे लौटा दिया गया।
बताते चलें कि वर्ष वर्ष 2015 के फरवरी एवं मार्च महीने में ओलावृष्टि से राबट्र्सगंज, घोरावल और दुद्धी तहसील क्षेत्र के किसानों का गेहूं, मसूर, मटर, चना आदि फसलों को भारी क्षति हुई थी। ओलावृष्टि से प्रभावित किसानों को मुआवजा देने के लिए लेखपालों से रिपोर्ट तैयार कराया गया था। एडीएम कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार सिर्फ घोरावल तहसलील क्षेत्र के लाली, कन्हारी, परसौना और मजूरही के लेखपालों ने ओलावृष्टि से प्रभावित 441 किसानों का नुकसान होने की रिपोर्ट दी।
जबकि राबट्र्सगंज और दुद्धी तहसील क्षेत्र के एक भी लेखपालों ने ओलावृष्टि से पीड़ित किसानों की रिपोर्ट नहीं भेजी। इसके चलते इन दोनों तहसीलों के एक भी किसानों को मुआवजा के नाम पर फूटी कौड़ी भी नहीं मिली। वर्ष 2016 में ओलावृष्टि से किसानों का नुकसान हुआ।
लेकिन राजस्वकमिर्यों ने ओलावृष्टि से एक भी किसानों के नुकसान होने की रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को नहीं दिया। अपर जिलाधिकारी रामचंद्र ने बताया कि वर्ष 2015 में ंशासन से ओलावृष्टि से प्रभावित किसानों को देने के लिए 5002000 रुपये मिला था।
लेखपालों कर रिपोर्ट 441 पीड़ित किसानों को 2611701 मुआवजा दिया गया। शेष मुआवजा देने के लिए आए रुपये को वापस कर दिया गया। ओलावृष्टि का कोई प्रकरण शेष नहीं है। उन्होंने बताया कि ओलावृष्टि से प्रभावित प्रति किसानों को 6800 रुपये प्रति हेक्टेयर और न्यूनतम 1500 रुपये दिया गया है।