बिजली की अघोषित कटौती से बेजार उपभोक्ताओं को प्रदेश के विद्युत नियामक आयोग ने रेगुलेटरी सरचार्ज-1 माफ कर राहत देने का एलान तो किया मगर हकीकत यह है कि यह राहत ऊंट के मुंह में जीरा के समान है। सरचार्ज माफी का घरेलू उपभोक्ताओं को कोई विशेष फायदा होने वाला नहीं है। हालांकि फौरी तौर पर व्यावसायिक उपभोक्ताओं के बिल में थोड़ी कमी जरूर दिखेगी। विद्युत नियामक आयोग ने पूर्वांचल में रेगुलेटरी सरचार्ज में 1.03 फीसदी की कटौती की है।
सरचार्ज माफी से उपभोक्ताओं को मिलने वाली राहत की बात करें तो एक हजार रुपये के बिल पर 10 रुपये की कमी आएगी। पूर्वांचल के अधिकांश घरेलू उपभोक्ताओं का बिल एक हजार रुपये से कम ही आता है। ऐसे में यह राहत ऊंट के मुंह में जीरा के समान ही बताई जा रही है। हालांकि पश्चिम यूपी के उपभोक्ताओं को नए नियम से थोड़ी राहत जरूर होगी क्यों कि वहां 2.84 फीसदी सरचार्ज कम हुआ है। वाराणसी जिले में चार लाख से अधिक उपभोक्ता हैं जबकि बिजली की खपत 400 मेगावाट के आसपास है। हालांकि गर्मी के मौसम में यह खपत 50 मेगावाट और बढ़ जाती है। बहरहाल, विद्युत नियामक आयोग ने एक अप्रैल से ही रेगुलेटरी सरचार्ज-1 को माफ करने का फैसला किया है।
इस फैसले से प्रदेश के 65 लाख बिजली-पंखे वाले उपभोक्ता प्रभावित होंगे जबकि लगभग दस लाख ट्यूबवेल वाले उपभोक्ताओं को इस नई व्यवस्था का फायदा होगा। पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के अधिकारियों का कहना है कि बिजली कंपनियां घाटे के नाम पर यह सरचार्ज वसूल रही थीं। यह सरचार्ज विद्युत वितरण निगम की परफार्मेंस के आधार पर अलग-अलग लागू था। बहरहाल, विद्युत नियामक आयोग के फैसले से पूर्वांचल के इलाहाबाद, बस्ती, गोरखपुर, मिर्जापुर, आजमगढ़ और वाराणसी मंडल के कुल 22 जिलों के उपभोक्ताओं को अगले महीने से मामूली राहत मिलनी शुरू हो जाएगी।