सोनभद्र। प्रबोधिनी (देवोत्थान) एकादशी 15 नवंबर को मनाई जाएगी। इस दिन भगवान श्रीहरि चिर निद्रा से जागेंगे। इसके साथ ही चातुर्मास समाप्त हो जाएगा और पिछले चार माह से ठप मांगलिक कार्य पुन: शुरू हो जाएंगे। प्रबोधिनी एकादशी को तुलसी-शालीग्राम पूजन का विशेष महत्व है। इसके तैयारी में आस्थावान जुट गए हैं। ज्योतिषाचार्य डॉ. एसएन तिवारी ने बताया कि 14 नवंबर को सुबह नौ बजे तक दशमी तिथि है। इसके बाद एकादशी तिथि प्रारंभ हो रही है, जो 15 नवंबर को सुबह 8.52 बजे तक रहेगी। एकादशी युक्त द्वादशी श्रेष्ठ माना गया है, इस नाते प्रबोधिनी या देवोत्थान एकादशी 15 नवंबर को मनाया जाएगा। धार्मिक मान्यता है कि इस एकादशी को भगवान शयन से उठते हैं। इसके बाद मांगलिक कार्य भी शुरू होते हैं। उन्होंने बताया कि प्रबोधिनी एकादशी के दिन तुलसी और शालीग्राम पूजा किया जाता है। आस्थावान इस दिन तुलसी विवाह भी करते हैं। इसी दिन गन्ने की पूजा करके सेवन शुरू किया जाता है। चातुर्मास समाप्त होने पर 19 नवंबर से वैवाहिक लग्न शुरू होगा। उन्होंने बताया चातुर्मास के दौरान मांगलिग कार्यक्रम नहीं होता है। कहा कि 16 दिसंबर से खरमाष लग रहा है। देवोत्थान एकादशी से खरमाष के बीच आठ वैवाहिक लग्न पड़ रहा है।