जनपद में विधानसभा चुनाव और लोकसभा चुनाव में पार्टियों का वोट प्रतिशत समान नहीं रहा है। खासकर 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने मोदी की लहर में जबरदस्त इजाफा किया। जबकि अन्य को नुकसान हुआ। वर्ष 2009 और 2014 के लोकसभा चुनाव और 2012 के विधानसभा चुनाव पर गौर करे तो वोटरों का रुझान बदला है। बता दें कि वर्ष 2009 से जिले में चार विधानसभा सीटें हो गई हैं। इसमें घोरावल, राबर्ट्सगंज, ओबरा और दुद्धी हैं। इसके पहले जिले में सिर्फ ढाई विधानसभा सीटें राबर्ट्सगंज, दुद्धी और राजगढ़ आंशिक ही रही। राजगढ़ सीट को समाप्त कर मिर्जापुर जिले की मड़िहान विधानसभा सीट बना दी गई, जबकि सोनभद्र में इसके बदले घोरावल और ओबरा नई सीट सृजित हुईं।
वर्ष 2009 में हुए लोकसभा चुनाव में जनपद में 49.07 प्रतिशत मतदान हुआ था। इसमें सपा को सर्वाधिक 36.36 फीसदी, बसपा को 27.92 फीसदी, भाजपा को 17.54 फीसदी और कांग्रेस को 9.37 फीसदी वोटिंग हुई थी। वहीं 2012 के विधानसभा चुनाव में जनपद का वोटिंग प्रतिशत 50 के पार पहुंच गया। कुल 58.44 प्रतिशत वोटिंग हुई। इसमें सपा का ग्राफ घटकर 29 फीसदी पर पहुंच गया। हालांकि सर्वाधिक वोटिंग 29 फीसदी सपा को ही हुई। बसपा का भी ग्राफ घटकर 25 फीसदी पहुंच गया, लेकिन दूसरे नंबर पर बसपा ही रही। भाजपा का ग्राफ घटकर 12 फीसदी और कांग्रेस का ग्राफ घटकर आठ फीसदी पर पहुंच गया।
वहीं, वर्ष 2014 के हुए लोकसभा चुनाव में जनपद ने 52.66 प्रतिशत मतदान हुआ। सपा का ग्राफ घटकर 15.35 फीसदी पहुंच गया। यही हाल बसपा का रहा जो घटकर 21.29 फीसदी पहुंच गया, हालांकि दूसरे नंबर पर बसपा को ही मत मिला। भाजपा के ग्राफ में तेजी से इजाफा हुआ और सर्वाधिक 42.69 फीसदी मत मिला। वहीं, कांग्रेस के ग्राफ में भी बढ़ोत्तरी हुई और 9.73 फीसदी मत मिला। ऐसे में सपा जहां तीसरे नंबर पर, वहीं कांग्रेस चौथे नंबर पर रही। अबकी बार यह देखना है कि भाजपा अपनी बढ़त बरकरार रख पाती है अथवा सपा-कांग्रेस गठबंधन और बसपा के मत प्रतिशत में इजाफा होगा।