केंद्रीय सड़क निधि (सीआरएफ) से जुड़ी जिले की तीन सड़क परियोजनाओं की प्रक्रिया पर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) के प्रदर्शन ऑडिट में गंभीर सवाल उठाए गए हैं। ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार 170.93 करोड़ रुपये की लागत वाली तीन सड़क परियोजनाओं के अनुमान को सीबीआर (मिट्टी भार सहने की क्षमता) टेस्ट रिपोर्ट का समर्थन नहीं मिला। इतना ही नहीं, इन कार्यों की तकनीकी मंजूरी से 76 दिन पहले ही निविदा आमंत्रित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई। तकनीकी मंजूरी मिलने से छह दिन पहले ही वित्तीय निविदाएं भी खोल दी गईं।
कैग ने वित्तीय वर्ष 2022-23 और इससे पूर्व में ऑडिट के दौरान सामने आए मामलों के आधार पर प्रदेश के वित्त और राजस्व से संबंधित विभागाें के कामकाज से जुड़ा ऑडिट किया था। इसमें नियमों के मुताबिक राजस्व वसूली, वित्तीय प्रबंधक, विभागीय कार्य और योजनाओं के क्रियान्वयन की स्थिति जांची थी। अब इसकी समग्र रिपोर्ट अगस्त में सार्वजनिक रूप से जारी की गई है। कैग की रिपोर्ट में प्रदेश के 27 डिविजन की चुनिंदा सड़कों काे ऑडिट में शामिल किया गया है। इसमें सोनभद्र की भी तीन सड़कें हैं। इन सड़कों को उन कार्यों की सूची में रखा गया है, जिनके अनुमान को सीबीआर टेस्ट रिपोर्ट का समर्थन नहीं मिला। इसमें वाराणसी-शक्तिनगर रोड की लागत 121.60 करोड़ रुपये, मुर्धवा, म्योरपुर, बभनी, चपकी रोड से छत्तीसगढ़ बॉर्डर तक की सड़क की लागत 33.23 करोड़ और इसी मार्ग के किमी 44 से छत्तीसगढ़ बॉर्डर तक की सड़क की लागत 16.10 करोड़ रुपये दर्ज है। तीनों सड़कों की कुल लागत 170.93 करोड़ रुपये है। अपनी रिपोर्ट में कैग ने विभागीय प्रक्रिया में तकनीकी स्वीकृति और निविदा प्रक्रिया के क्रम को लेकर सवाल उठाए हैं। आपत्ति जताते हुए कहा है कि तकनीकी स्वीकृति से पहले एनआईटी जारी करने का निर्णय किस स्तर पर लिया गया, वित्तीय निविदा तकनीकी स्वीकृति से पहले क्यों खोली गई और 170.93 करोड़ रुपये के अनुमान के लिए सीबीआर टेस्ट रिपोर्ट का आधार क्यों उपलब्ध नहीं था।
मंजूरी 13 जुलाई को, टेंडर प्रक्रिया 28 अप्रैल से
ऑडिट में इन तीनों कार्यों के संबंध में तकनीकी स्वीकृति और निविदा आमंत्रण की तिथि (एनआईटी) का मिलान किया गया है। तीनों परियोजनाओं की तकनीकी स्वीकृति 13 जुलाई 2018 को हुई, जबकि एनआईटी 28 अप्रैल 2018 को जारी किया गया। यानी तकनीकी स्वीकृति मिलने से करीब 76 दिन पहले निविदा आमंत्रित कर दी गई थी। ऑडिट में वित्तीय निविदा खोलने की प्रक्रिया भी जांची गई। इन तीनों कार्यों को उन मामलों में शामिल किया गया है, जहां तकनीकी स्वीकृति से पहले वित्तीय बोलियां खोली गईं। तीनों मामलों में तकनीकी स्वीकृति और वित्तीय बोली खोलने के बीच महज छह दिन का अंतर दर्ज है। ऑडिट रिपोर्ट ने स्पष्ट किया है कि जांच के दौरान सड़क परियोजनाओं के अनुमान तैयार करने से लेकर निविदा प्रक्रिया तक की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में है।
यह है सीबीआर टेस्ट
सीबीआर यानी कैलिफोर्निया बीयरिंग रेसियो परीक्षण सड़क निर्माण में मिट्टी/सबग्रेड की मजबूती का आकलन करने के लिए इस्तेमाल होता है। सड़क की डिजाइन और उसकी परतों से जुड़े अनुमान तैयार करने में ऐसे तकनीकी परीक्षणों की भूमिका होती है। ऐसे में कैग रिपोर्ट में संबंधित अनुमानों को सीअीआर टेस्ट रिपोर्ट का समर्थन नहीं मिलना, सड़क की लागत के तकनीकी आधार पर सवाल खड़ा करता है।
चंदौली में भी लेवा-इलिया रोड का टेंडर 86 दिन पहले निकला
सोनभद्र। केंद्रीय सड़क निधि से जुड़ी चंदौली की कई सड़क परियोजनाओं की प्रक्रिया पर कैग ने सवाल उठाए हैं। रिपोर्ट के अनुसार लेवा-इलिया रोड के लिए तकनीकी स्वीकृति 10 अक्तूबर 2018 को दर्ज है, जबकि निविदा आमंत्रण सूचना 16 जुलाई 2018 को जारी किया गया। यानी तकनीकी स्वीकृति से 86 दिन पहले निविदा प्रक्रिया शुरू कर दी गई। इस सड़क की स्वीकृत लागत 37.95 करोड़ रुपये दर्ज है। इसी तरह आह्रौरा-चकिया-इलिया रोड के एक कार्य में तकनीकी स्वीकृति से पहले एनआईटी जारी होने का अंतर 71 दिन दर्ज किया गया है। इसके अलावा चंदौली की एक अन्य सड़क परियोजना में भी तकनीकी स्वीकृति से पहले निविदा प्रक्रिया शुरू किए जाने का मामला ऑडिट में दर्ज है। रिपोर्ट में काम पूरा होने में हुई देरी का भी उल्लेख है। लेवा-इलिया रोड के कार्य में 198 दिन की देरी दर्ज की गई। वहीं अहरौरा-चकिया-इलिया रोड के कार्य में 102 दिन की देरी सामने आई।
कैग रिपोर्ट का अध्ययन किया जाएगा। जो भी कमियां और सुझाव होंगे उसे दूर कराते हुए नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। -एसके सिंह, एक्सईएन, लोक निर्माण विभाग, सोनभद्र।