रोशनी और खुशियों के त्योहार दीपावली पर देखभाल कर आतिशबाजी करें। पटाखों के तेज धमाके सुनने की शक्ति छीन सकते हैं। इससे त्योहार की खुशियां काफूर हो सकती है।
जिला अस्पताल के ईएनटी चिकित्सक डॉ. प्रीतम पाठक ने लोगों को कानों की सुरक्षा को लेकर सतर्क किया। उन्होंने बताया कि पटाखों से निकली 35 डेसीबल तीव्रता की ध्वनि कानों के लिए कष्टदायक होती है।
अचानक निकली 70 डेसीबल की ध्वनि भयानक पीड़ा के साथ कान के परदे को खराब कर सकती है। सभी को चाहिए कि कम आवाज वाले और कम से कम पटाखें जलाएं।
पटाखे फोड़ने के समय कानों में रूई लगा लें। ईएनटी का कहना है कि 70 डेसीबल से अधिक तीव्रता के धमाके के बाद कान में स्थाई बहरापन आ सकता है, जो ऑपरेशन के बाद भी ठीक नहीं हो सकता है।
बाजार में सौ से लेकर 150 डेसीबल तक पटाखें देखने को मिल रहे हैं। इससे खास कर बच्चों के अधिक प्रभावित होने की आशंका रहती है।
नहीं मापी जाती ध्वनि की तीव्रता
स्वास्थ्य विभाग के पास ध्वनि की तीव्रता मापने का यंत्र नहीं है। दीपावली पर आतिशबाजी के दौरान कभी भी ध्वनि की तीव्रता नहीं मापी जाती। न ही पटाखों पर उनकी तीव्रता अंकित होती है।